सत्संगतिः संस्कृत निबंध
सतां / सज्जनानां संगतिः सत्संगतिः कथ्यते। सज्जनानां संगत्या हृदयं विचारं च पवित्रं भवति। अनया जनः स्वार्थभावं परित्यज्य लोक कल्याणकामः भवति। दुर्जनानां संगत्या दुर्बुद्धिः आयाति। स्वाति नक्षत्रस्य जलमपि सर्पाणां संगत्या विषं भवति। परन्तु तत् जलं कदलीपत्रस्य सम्पर्के आगत्य कर्पूरं भवति। अतएव कथ्यते-सत्सङ्गतिः कथय किं न करोति पुसांम्।
Hindi translation
नेक लोगों की संगति को सत्संगति कहते हैं। नेक लोगों की संगति से दिल और दिमाग साफ होता है। इससे इंसान स्वार्थ छोड़कर दुनिया की भलाई चाहता है। बुरे लोगों की संगति से बुरी बुद्धि आती है। स्वाति नक्षत्र का पानी भी सांपों की संगति से ज़हरीला हो जाता है, लेकिन वह पानी केले के पत्ते के संपर्क में आकर कपूर बन जाता है। इसीलिए कहा जाता है, “मुझे बताओ कि सच्ची संगति इंसानों के साथ क्या नहीं करती।
