प्रश्न 1. अमेरिका या नई दुनिया की खोज क्यों हुई ? उत्तर— अमेरिका या नई दुनिया की खोज इसलिए हुई कि ‘भारत’ की खोज में निकला क्रिस्टोफर कोलम्बस भटककर अमेरिका पहुँच गया और उसी को उसने भारत समझ लिया। यह घटना 1492 की है । बाद में जब भारत का पता चला गया तो यूरोपियनों ने अमेरिका को ‘नई दुनिया’ से सम्बोधित किया, हालाँकि उसका नाम अमेरिका ही प्रचलित रहा। जहाँ तक बात है कि इसकी खोज क्यों हुई तो यही कहा जा सकता है कि नई दुनिया या अमेरिका की खोज अनजाने में ही हो गई। पहले से समझ-बूझ कर इसे नहीं खोजा गया था ।
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प्रश्न 2. “नई दुनिया की खोज इंग्लैंड के लिए वरदान साबित हुआ।‘ कैसे ? उत्तर— नई दुनिया की खोज इंग्लैंड के लिए वरदान इस अर्थ में साबित हुआ कि बिना प्रयत्न उसे इतना बड़ा भूखंड प्राप्त हो गया। इंग्लैंड के बासिंदों का एक बड़ा भाग अमेरिका चला आया, जिससे वहाँ जनसंख्या की अधिकता से राहत मिली। दूसरी ओर अंग्रेजों ने अमेरिकी आदिवासियों को (जिन्हें इन लोगों ने रेड इंडियन कहा) मार डाला और जो बच गए, इधर-उधर छिपकर रहने लगे। इंग्लैंड वालों ने वहाँ के जंगलों को काटकर खेती के योग्य जमीन बनाई और गेहूँ उपजाने लगे । अमेरिकी गेहूँ से इंग्लैंड के गोदाम भरे रहने लगे और उसके निर्यात से आय भी प्राप्त हुई। बाद में कृषि के साथ वहाँ औद्योगिक विकास भी हुआ और रेल की पटरियाँ बिछाई गईं ।
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प्रश्न 3. ” मुक्त व्यापार के सिद्धांत ने उपनिवेशवासियों को क्रांति के लिए प्रेरित किया ।” कैसे ? उत्तर — मुक्त व्यापार के सिद्धांत का प्रचार उस काल में आरंभ हो रही थी । सर्वत्र : यह सिद्धांत लागू करने पर जोर दिया जा रहा था कि व्यापार में राज्य का हस्तक्षेप कम- से-कम हो या नहीं हो । उधर उपनिवेशक मातृ देश अपने उपनिवेशों का अधिक-से-अधक आर्थिक शोषण करते रहना अपना अधिकार समझते थे । इंग्लैंड अपने उपनिवेश अमेरिका का आर्थिक शोषण ही कर रहा था, जो उपनिवेशवासियों को नागवार लग रहा था। इंग्लैंड वाले व्यापार को राज्यकर से मुक्त रखना चाहते थे । इस प्रकार हम देखते हैं कि ‘मुक्त व्यापार के सिद्धांत’ ने उपनिवेशवासियों को क्रांति के लिए प्रेरित किया ।
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प्रश्न 4. “अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम ने फ्रांस पर भी प्रभाव डाला ।” कैसे ? उत्तर—अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में फ्रांसीसी सैनिकों ने भी भाग लिया था, जिनका. नेतृत्व ‘लफायतें’ ने किया था । युद्धोपरांत जब ये सैनिक फ्रांस पहुँचते तो इन्होंने भी राजतंत्र के विरुद्ध जनता को उकसाना शुरू किया कि वे राजा का विरोध करें । युद्ध के कारण फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई थी। जनता पर करों का बोझ बढ़ता जा रहा था, जबकि मुटठी भर अभिजात लोग तथा राजा-रानी तथा इनके दरबारी रंग-रेलियाँ मनाने में मग्न थे । ‘लिफायतें’ के सैनिकों ने इन्हीं बातों का लाभ उठाया फ्रांसीसी जनता को राजा के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए तैयार किया ।
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प्रश्न 5. क्या अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के परिणामों ने औपनिवेशिक विश्व को प्रभावित किया ? उत्तर— निश्चित रूप से यह कहना वाजिब होगा कि अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की सफलता और इसके परिणामों ने औपनिवेशिक विश्व को काफी प्रभावित किया । वह ऐसा समय था कि विश्व के कोने-कोने में यूरोप के किसी-न-किसी देश का उपनिवेश स्थापित हो चुका था । जिन देशों में उनका उपनिवेश नहीं भी था, उस देश का शोषण वे किसी- नं-किसी प्रकार करते ही जा रहे थे । उदाहरण के लिए चीन को लिया जा सकता है । शोषण के विरुद्ध ही वहाँ ‘अफीम युद्ध’ जैसी घटना घटी थी । अमेरिका को स्वतंत्र होते देख विश्व के सभी उपनिवेशों की जनता स्वतंत्रता के लिए कुलबुलाने लगी। जिस समय अमेरिका से इंग्लैंड जूझ रहा था, उस समय अधिकांश उपनिवेशों में अपनी पकड़ मजबूत करने में भी लगा हुआ था । इसका अर्थ था कि एक ओर जहाँ वह अपना पैर जमाने का प्रयत्न कर रहा था, दूसरी ओर उसी समय वहाँ की जनता स्वतंत्रता प्राप्ति की उपाय में जुटी हुई थी ।
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VI. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :
प्रश्न 1. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के किन्हीं तीन प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिए । उत्तर—अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख तीन कारण निम्नांकित थे :
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(1) राजनीतिक स्वायत्तता का अभाव —अमेरिकी उपनिवेशों में अधिक संख्या में इंग्लैंडवासी ही थे । कारण कि वहाँ के मूल निवासियों को उन्होंने या तो मार डाला था या भगा दिया था। जो बच गए थे उनसे गुलामी कराई जाती थी । वहाँ जितने इंग्लैंड वाले थे, उन्होंने इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था एवं विधि-विधान को देखा था । वे भी उन उपनिवेशों में वैसी ही प्रजातांत्रिक व्यवस्था स्थापित करना चाहते थे। लेकिन इंग्लैंड में बैठे जो लोग शासन चला रहा थे, उन्हें यह मंजूर नहीं था । गवर्नर इंग्लैंड से ही नियुक्त हो कर आते थे, जो अमेरिकावासियों के प्रति नहीं, बल्कि इंग्लैंड के प्रति उत्तरदायी होते थे। इंग्लैंड वाले अमेरिकी अंग्रेजों को शासन करने योग्य समझते भी नहीं थे । फलतः संघर्ष अवश्यम्भावी हो गया ।
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राजनीति
(2) धार्मिक एवं सामाजिक व्यवस्था में अंतर—अमेरिकी उपनिवेश तथा इंग्लैंड के बीच धार्मिक एवं सामाजिक व्यवस्था में भी अंतर था । जहाँ इंग्लैंड के लोग ऐंग्लिकन मत को माननेवाले और चर्च के अधिकारों में विश्वास करनेवाले परम्परावादी थे, वहीं अमेरिका में आ बसी अंग्रेज जनता प्यूरिटन मत को मानती थी तथा चर्च और पादरियों के पाखंड का खंडन करती थी । बहुत-से प्यूरिटनों तथा प्रोटेस्टेंटों ने धार्मिक उत्पीड़न से तंग आकर इंग्लैंड छोड़ अमेरिका में शरण ले रखी थी । इन लोगों में स्वतंत्रता की भावना कूट-कूटकर भरी थी और इनमें जुझारूपन भी था । इनमें सैनिक क्षमता भी विद्यमान थी । इन्होंने प्रचार- प्रसारकर अपने मातृ देश से सम्बंध-विच्छेद कर लेने के लिए अमेरिकियों को तैयार कर लिया ।
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(3) आपत्तिजनक कर — सप्त वर्षीय युद्ध में इंग्लैंड को काफी आर्थिक हानि हुई थी । इसकी क्षतिपूर्ति इंग्लैंड वाले अमेरिकियों पर कर लगाकर ही करना चाहते थे । उनका मानना था कि इस युद्ध से अमेरिका को ही लाभ हुआ है । अतः इन्हें कुछ आर्थिक भार भी बर्दाश्त करना चाहिए । प्रधानमंत्री ग्रेनविले ने 1765 में अमेरिकियों पर स्टाप एक्ट थोप दिया। इस एक्ट के मुताबिक किसी भी सरकारी दस्तावेज पर 20 शिलिंग का स्टांप लगाना अनिवार्य हो गया । ऐसा स्टांप अखबारों पर लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया । फिर 1767 में ब्रिटिश संसद ने कुछ उपभोक्ता वस्तुओं, जैसे— कागज, काँच, (शीशा), चाय और तेल पर कर लगा दिया। इस पर अमेरिकी जनता भड़क उठी । इन करों का अमेरिका में काफी विरोध हुआ । सेमुअल एडक्स ने ‘प्रतिनिधत्व नहीं तो कर नहीं का नारा दिया । ये ब्रिटिश संसद में स्थान सुरक्षित कराना चाहते थे, जो इंग्लैंड को मंजूर नहीं था ।
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प्रश्न 2. लोकतांत्रिक स्तर पर अमेरिकी संग्राम ने विश्व को कैसे प्रभावित किया ? उत्तर— लोकतांत्रिक स्तर पर अमेरिकी संग्राम ने विश्व को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित किया है :
(क) विश्व भर की जनता में शासन में भागीदारी की ललक पैदा हुई । अधिकांश देशों में राजा के विरुद्ध राजनीतिक चेतना का विकास हुआ और उपनिवेशों में भी अपने- अपने देशों की संसद में भागीदारी की माँग होने लगी।
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(ख) जनता धार्मिक स्वतंत्रता तथा अंतःकरण की स्वतंत्रता के लिए छटपटाने लगी। मौलिक अधिकारों की माँग भी जोर पकड़ने लगी, जिनके माध्यम से लोगों की मूलभूत स्वतंत्रता स्वीकार की गई।
(ग) अमेरिका में 1789 में लिखित संविधान लागू किया गया, जबकि विश्व के किसी भी देश में लिखित संविधान नहीं था । इंग्लैंड में भी नहीं, जहाँ रिवाज और परम्परा के सहारे शासन चलता था। सभी देशों में लिखित संविधान की माँग जोर पकड़ने लगी
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(घ) अमेरिका में गणतंत्र स्थापित हुआ और माँटेस्क्यू द्वारा प्रतिपादित शक्ति पृथक्करण सिद्धांत को मान्यता मिल गई। इसका अर्थ था, शासन के सभी अधिकार गणतंत्र की जनता में निहित थे। ऐसा ही अधिकार सभी देशों की जनता चाहने लगी ।
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(ङ) अन्य देशों में अमेरिका से भी दो कदम आगे बढ़कर बालिग मताधिकार के सार्वभौम अधिकार के साथ महिलाओं को भी मतदान का अधिकार देने की बात उठने लगी, जबकि अमेरिकी लिखित संविधान में भी न तो बालिग मताधिकार लागू था और न महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया गया था । सम्भवतः इंग्लैंड की देखा देखी मतदान का अधिकार सम्पत्ति को माना गया था ।
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(च) सच पूछा जाय तो फ्रांस की राज्य क्रांति की जड़ में अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम और उसकी सफलता में छिपी हुई थी। जिन फ्रांसीसी सैनिकों ने युद्ध में भाग लिया था, उन्होंने राजा के विरुद्ध ‘उठ खड़ा होने के लिए जनता को तैयार किया और उन्हें सफ़लता भी मिली ।
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प्रश्न 3. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के परिणामों की आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए । उत्तर—अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के निम्नलिखित परिणाम हुए :
(क) एक बहुमूल्य उपनिवेश ब्रिटेन के हाथ से निकल गया, जबकि सब अमेरिकाबासी ब्रिटेन के ही नागरिक थे । स्वतंत्रता संग्राम के बाद ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ नाम से एक शक्तिशाली राष्ट्र का उदय हुआ, जिसने पूरे विश्व को प्रभावित किया
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(ख) वास्तव में अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम एक प्रकार से वाणिज्यवादी व्यापारिक प्रतिबंधों के विरुद्ध एक खुला विद्रोह था। अमेरिका ने मुक्त व्यापार प्रणाली को बल प्रदान किया, जिसका प्रतिपादन एडमस्मिथ ने की थी ।
(ग) अमेरिकी स्वतंत्र संग्राम की सफलता का अर्थ शक्तिशाली ब्रिटेन की हार थी । अमेरिकियों की सफलता के पीछे ब्रिटिश राजा जार्ज तृतीय, उसके मंत्रियों और संसद की अदूरदर्शिता थी । जार्ज तृतीय ‘तानाशाह’ बनने का सपना देखता था,
(घ) इसका परिणाम यह भी हुआ कि स्वयं इंग्लैंड में राजा को अनेक करने पड़े। आयरलैंड की संसद को स्वतंत्र मान लिया गया। कैथोलिक आयरिशों को मतदान का अधिकार देना पड़ा। आयरिश संसद वेस्टमिंस्टर संसद से जुड़ गया ।
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(ङ) अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की सफलता ने फ्रांस को तो इतना प्रभावित किया कि जल्द ही फ्रांसीसी क्रांति आरंभ हो गई । ‘लिफायते’ के नेतृत्व में फ्रांसीसी सैनिकों ने भाग लिया था। जब वे स्वदेश लौटे तो निरंकुश राजतंत्र के विरुद्ध जनता को जागरुक बनाया । सप्तवर्षीय युद्ध में फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था भी लड़खड़ा गई थी ।
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प्रश्न 4. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की पराजय के क्या कारण थे? उत्तर – अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों की पराजय के निम्नलिखित कारण थे :
(क) अमेरिकी उपनिवेश अटलांटिक महासागर के उस पार तीन हजार मील की दूरी पर था। इस कारण सैनिक मदद या सैनिकों के लिए रसद पहुँचाना कठिन था ।
(ख) अंग्रेज सैनिकों को अमेरिका के भौगोलिक बनावट और स्थिति का बिल्कुल ही पता नहीं था। फल होता था कि कभी-कभी और कहीं-कहीं ये अकारण ही अमेरिकी सैनिकों से घिर जाते थे और मारे जाते थे ।
(ग) अमेरिका की सामरिक शक्ति से अंग्रेज पूर्णतः अनजान थे । अधिकांश अंग्रेज तो इसे मात्र गृहयुद्ध ही समझते थे, जो समझते थे कि आनन-फानन में वे अमेरिकियों . को परास्त कर देगें ।
(घ) उपनिवेशवासियों में एकता तो थी ही, वे उत्साह से भी साराबोर थे। इनको वाशिंगटन जैसे निपुण योद्धा का नेतृत्व प्राप्त था। वे अमेरिकी स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार रहते थे।
(ङ) ब्रिटिश सेनापति अनुभवी तो थे, लेकिन अमेरिका में उन्होंने कुछ सामरिक भूलें कर दीं। इधर इंग्लैंड का हाल यह था कि जॉर्ज तृतीय की हठधर्मिता से अनेक राजनेता सरकार से अलग हो गए ।
(च) ब्रिटेन किसी विदेशी सहायता से सर्वदा वंचित रहा जबकि दूसरी ओर अमेरिकी स्वतंत्रता सेनानियों को अनेक देशों से लगातार मदद की आपूर्ति होती रही । अमेरिकियों को युद्ध में कोई कठिनाई आड़े नहीं आई ।