प्रदूषण

प्रदूषण (204A11, 2013A, 2019A11, 2020All]

विचार बिन्दु 1. भूमिका, 2. जल प्रदूषण, 3. वायु प्रदूषण, 4. ध्वनि प्रदूषण, 5. प्रदूषणों का निदान, 6. उपसंहार। भूमिका-प्रदूषण का अर्थ है- प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। न शुद्ध

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वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना। ज्यों-ज्यों मानव सभ्यता का विकास हो रहा है, त्यों-त्यों पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है। इसे बढ़ाने में मनुष्य के क्रियाकलाप और उसकी जीवन शैली काफी हद तक जिम्मेवार है।

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जल प्रदूषण-जल सभी प्राणियों के लिए अनिवार्य वस्तु है। पेड़-पौधे भी आवश्यक तत्त्व जल से ही घुली अवस्था में ग्रहण करते हैं। जल में अनेक कार्बनिक, अकार्बनिक पदार्थ, खनिज तत्त्व व गैसें घुली होती हैं

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। यदि इन तत्त्वों की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है तो जल हानिकारक हो जाता है, और इस जल को हम प्रदूषित कहते हैं।

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वायु प्रदूषण-वायु – वायु प्रदूषण प्रदूषण सबसे अधिक व्यापक और हानिकारक है। वायुमंडल में सभी तरह के गैसों की मात्रा निश्चित रहती है और अधिकांशतः ऑक्सीजन और नाइट्रोजन होती है। श्वसन, अपघटन और सक्रिय ज्वालामुखियों से उत्पन्न गैसों के अतिरिक्त हानिकारक

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गैसों की सर्वाधिक मात्रा मनुष्य के कार्य-कलापों से उत्पन्न होती है। इनमें लकड़ी, कोयले, खनिज तेल तथा कार्बनिक पदार्थों के ज्वलन का सर्वाधिक योगदान है।

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ध्वनि प्रदूषण – महानगरों में अनेक प्रकार के वाहन, लाउडस्पीकर, बाजे एवं औद्योगिक संस्थानों की मशीनों के शोर ने ध्वनि प्रदूषण को जन्म दिया है। ध्वनि प्रदूषण से न केवल मनुष्य की श्रवणशक्ति का ह्रास होता है, वरन् उसके मस्तिष्क पर भी इसका घातक प्रभाव पड़ता है।

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परमाणु शक्ति उत्पादन व नाभिकीय विखंडन ने वायु, जल व ध्वनि तीनों प्रदूषणों को काफी विस्तार दे दिया है।

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प्रदूषणों का निदान-प्रदूषण से बचने के लिए निम्नलिखित उपायों पर अमल करना आवश्यक है-

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(i) वृक्षारोपण का कार्यक्रम तेजी से चलाया जाना चाहिए।

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(ii) वनों के विनाश पर रोक लगनी चाहिए।

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(iii) वर्जित पदार्थों के निष्कासन के लिए कोई दूर स्थान पर व्यवस्था करनी चाहिए। (

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iv) लाउडस्पीकरों का उपयोग कम होना चाहिए।

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प्रदूषण को कम करने के लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।

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उपसंहार-इस तरह हमारा पर्यावरण गंभीर असंतुलन के दौर से गुजर रहा है और इस असंतुलन के कारण जैव-विविधता पर गंभीर संकट है। जो हवा, जल और अन्न हमारे जीवन का आधार है वहीं प्रदूषित होकर हमारे लिए जहर बन रहे है।

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हमें समय रहते सचेत हो जाना चाहिए। हमें पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने एवं प्रदूषण को कम करने के हर संभव प्रयास करना चाहिए।

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