विचार बिन्दु – 1. भूमिका, 2. महापुरुष का परिचय, 3. महापुरुष का आधार, 4. सामान्य जन के लिए संदेश, 5. उपसंहार।
भूमिका- भूमिका- मेरे आदर्श पुरुष महात्मा गाँधी हैं। मुझे उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रेरणादायक प्रतीत होता है। सत्य के मार्ग पर चलना उन्होंने पूरी दुनिया को सिखलाया। अहिंसा के रास्ते को कभी मनुष्य को नहीं छोडने की सीख उन्होंने दी। सत्याग्रह की सीख कभी भूली न जा सकेगी। यही कारण है कि वे मेरे आदर्श महापुरुष हैं।
महापुरुष का परिचय-महात्मा गाँधी विश्वभर में एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व के
महापुरुष का परिचय- रूप में जाने जाते हैं। भारत को उन्होंने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलकर आजाद कराया। महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। इनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 ई० पोरबंदर गुजरात में हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का पुतलीबाई था। भारत में उन्हें ‘बापू’ और ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है।
महापुरुष का आधार– महात्मा गाँधी के महापुरुषत्व का आधार है शुचितापूर्ण ढंग से चलकर मानवता प्रदर्शित करना। वे अपने जीवन को सत्य का प्रयोग मानते थे। वे यज्ञपूर्ण जीवन जीते थे। सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह के मार्ग पर वे चलते थे। वे सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों में विश्वास रखते थे।
सामान्य जन के लिए संदेश- गाँधीजी विश्व बंधुत्व के पोषक एवं मानव मात्र के हित-चिन्तक थे। उन्होंने अपना जीवन सत्य की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया। वे सामान्य जन को सत्य और अहिंसा का संदेश दिया। उनका जीवन भोगवादी नहीं वरन् त्यागपूर्ण था।
उनका जीवन-त्याग, क्षमा, दया, तपस्या, सद्भाव आदि के पवित्र भावों को आचरण में लाने का पर्याय है। गाँधीजी की अन्तर्दृष्टि इस सच्चाई को परख चुकी थी कि मनुष्य की वास्तविक शक्ति उसके शरीर में न होकर उनकी आत्मा में है। अपने सपनों के भारत में उन्होंने कहा है- ‘मैं ऐसे भारत के लिए काम करूँगा जिसमें गरीब-से-गरीब भी यह महसूस करे कि यह देश उसका है और इसके निर्माण में उसकी जोरदार आवाज है।
उपसंहार-समासतः हम कह सकते हैं कि आधुनिक युग में महात्मा गाँधी ही उच्च व्यक्तित्व के महापुरुष थे। इसीलिए वे मेरे आदर्श महापुरुष हैं। मैं उनके बताए रास्ते पर चलता हूँ। उन्होंने अपना जीवन समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित किया।