Bihar Board Class 9 Economics Chapter 2

Bihar Board Class 9 Economics Chapter 2 Solutions – मानव एवं संसाधन

लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मानव तथा मानव संसाधन को परिभाषित करें।
उत्तर- मानव वह प्राणी है जो बुद्धि और कौशल का उपयोग करके उत्पादन करता है। मानव संसाधन किसी देश की जनसंख्या की कौशल, ज्ञान और क्षमताओं का समूह है जो आर्थिक विकास में योगदान देता है।
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प्रश्न 2. मानव संसाधन उत्पादन को कैसे बढ़ाता है ?
उत्तर- मानव संसाधन अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार क्षमता से उत्पादकता बढ़ाता है। यह प्राकृतिक संसाधनों का कुशल उपयोग करके और नई तकनीकों को विकसित करके उत्पादन को बढ़ाता है।

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प्रश्न 3. किसी देश में मानव-पूँजी के दो प्रमुख स्रोत क्या हैं ?
उत्तर- मानव पूंजी के दो प्रमुख स्रोत हैं: शिक्षा और स्वास्थ्य। ये दोनों व्यक्ति की उत्पादक क्षमता को बढ़ाते हैं।
प्रश्न 4. किसी व्यक्ति को प्रशिक्षण देकर कुशल बनाना क्यों जरूरी है ?
उत्तर- प्रशिक्षण व्यक्ति को विशिष्ट कौशल और ज्ञान प्रदान करता है जो उसे अधिक उत्पादक बनाता है। यह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 5. भारत में जनसंख्या के आकार को एक बार चार्ट (दंड ग्राफ) द्वारा ्पष्ट करें।
उत्तर-
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प्रश्न 6. बिहार के सबसे अधिक जनसंख्या-वृद्धि वाले 5 जिलों के नाम लिखें।

उत्तर- बिहार के सबसे अधिक जनसंख्या वाले पांच जिले हैं: पटना, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, मधुबनी और गया।

 

प्रश्न 7. बिहार के सबसे कम जनसंख्या वाले 5 जिलों के नाम लिखें।
उत्तर- बिहार के सबसे कम जनसंख्या वाले पांच जिले हैं: शिवहर, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर और खगड़िया।
प्रश्न 8. बिहार देश का सबसे कम साक्षर राज्य है, इसके मुख्य दो कारण लिखें।
उत्तर- बिहार में निम्न साक्षरता के दो मुख्य कारण हैं: कम प्राथमिक नामांकन दर और उच्च स्कूल छोड़ने की दर। इन समस्याओं को दूर करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।
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 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.मानव संसाधन क्या है ? मानव संसाधन को मानव पूँजी के रूप में केसे परिवर्तित किया जाता है ?
उत्तर- मानव संसाधन किसी देश की जनसंख्या की कौशल, ज्ञान और क्षमताओं का समूह है। यह एक देश की कार्यशील जनसंख्या की योग्यताओं और कुशलताओं को दर्शाता है। मानव संसाधन को मानव पूंजी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया निवेश और विकास पर आधारित है।
इस परिवर्तन के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण में निवेश किया जाता है। जब व्यक्ति विशेष कौशल और ज्ञान प्राप्त करता है, तो वह राष्ट्रीय उत्पादन में अधिक योगदान देने की क्षमता रखता है। उदाहरण के लिए, एक छात्र शिक्षा के माध्यम से इंजीनियर, डॉक्टर या शिक्षक बन सकता है।
यह प्रक्रिया व्यक्ति को न केवल एक संसाधन बनाती है, बल्कि उसे राष्ट्र की मूल्यवान संपत्ति में भी परिवर्तित करती है। मानव पूंजी का निर्माण देश की अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह कुल राष्ट्रीय उत्पाद के निर्माण में सहायक होती है।
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प्रश्न 2. मानव पूँजी और भौतिक-पूँजी में क्या अंतर है ? इसे तालिका द्वारा स्पष्ट करें। क्या मानव पूँजी भौतिक पूँजी से श्रेष्ठ है ?
उत्तर- मानव पूंजी और भौतिक पूंजी में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं:
  1. प्रकृति: मानव पूंजी सक्रिय संसाधन है, जबकि भौतिक पूंजी निष्क्रिय।
  2. मूर्तता: मानव पूंजी अमूर्त है, भौतिक पूंजी मूर्त।
  3. स्वामित्व: मानव पूंजी को स्वामी से अलग नहीं किया जा सकता, भौतिक पूंजी को किया जा सकता है।
  4. गतिशीलता: मानव पूंजी सीमित गतिशील है, भौतिक पूंजी पूर्णतः गतिशील।
  5. मूल्यह्रास: मानव पूंजी में निवेश से मूल्यह्रास की भरपाई हो सकती है, भौतिक पूंजी में नहीं।
  6. लाभ: मानव पूंजी व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ पहुंचाती है, भौतिक पूंजी मुख्यतः निजी लाभ देती है।
मानव पूंजी कई मायनों में भौतिक पूंजी से श्रेष्ठ मानी जाती है। यह अधिक लचीली, नवोन्मेषी और दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। मानव पूंजी भौतिक पूंजी के कुशल उपयोग को भी सुनिश्चित करती है।
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प्रश्न 3. भारत में मानवीय-पूँजी निर्माण के विकास का परिचय दें।
उत्तर- भारत में मानवीय पूंजी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह देश की विकास योजनाओं का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा है। इसका लक्ष्य दीर्घकालिन आर्थिक सुधारों को सफल बनाना है।
पिछले कुछ दशकों में, भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में महत्वपूर्ण निवेश किया है। इसके परिणामस्वरूप, साक्षरता दर में वृद्धि, उच्च शिक्षा में नामांकन में बढ़ोतरी, और तकनीकी शिक्षा में विस्तार हुआ है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार देखा गया है, जिससे जीवन प्रत्याशा बढ़ी है और शिशु मृत्यु दर घटी है। कौशल विकास कार्यक्रमों ने रोजगार योग्यता में सुधार किया है।
हालांकि, अभी भी कई चुनौतियां हैं, जैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, और कौशल-रोजगार असंतुलन। इन क्षेत्रों में निरंतर प्रयास और निवेश की आवश्यकता है ताकि भारत अपने मानव संसाधन का पूर्ण लाभ उठा सके।
प्रश्न 4. मानवीय साधनों के विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास की भूमिका की विवेचना करें।
उत्तर- शिक्षा मानव पूंजी निर्माण का आधार है। यह व्यक्ति को ज्ञान, कौशल और क्षमताओं से समृद्ध करती है, जो उसे अधिक उत्पादक बनाता है। शिक्षा न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाती है, बल्कि नवाचार और उद्यमशीलता को भी प्रोत्साहित करती है। प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्वास्थ्य मानव पूंजी का दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है। स्वस्थ व्यक्ति अधिक उत्पादक और कार्यकुशल होता है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं जीवन प्रत्याशा बढ़ाती हैं और कार्यशील आयु को विस्तारित करती हैं। स्वास्थ्य पर किया गया खर्च एक निवेश है जो दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।
आवास मानवीय विकास का एक अनिवार्य पहलू है। उचित आवास व्यक्ति को सुरक्षा, स्थिरता और एक बेहतर जीवन स्तर प्रदान करता है। यह उसकी कार्य क्षमता और उत्पादकता को बढ़ाता है। साफ-सुथरा और स्वस्थ रहने का वातावरण मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
इन तीनों – शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास – का संयुक्त प्रभाव मानव संसाधन विकास पर बहुत गहरा होता है। ये न केवल व्यक्तिगत स्तर पर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं, बल्कि समग्र रूप से देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी योगदान देते हैं।
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प्रश्न 5. भारत की राष्ट्रीय जनसंख्या-नीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर- भारत की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, जो 15 फरवरी 2000 को घोषित की गई, देश के दीर्घकालीन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।
नीति के तत्कालीन लक्ष्यों में गर्भनिरोधक की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना शामिल है। मध्यकालीन लक्ष्य में 2010 तक कुल प्रजनन दर को प्रतिस्थापन स्तर तक लाना था। दीर्घकालीन लक्ष्य 2045 तक जनसंख्या को एक स्थिर स्तर पर लाना है, जो पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक विकास के अनुकूल हो।
इस नीति में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष जोर दिया गया है। महिला सशक्तीकरण, बाल स्वास्थ्य और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। परिवार नियोजन सेवाओं को बेहतर बनाने और जागरूकता फैलाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
नीति का उद्देश्य केवल जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि समग्र मानव विकास भी है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर जोर दिया गया है। यह नीति राज्य सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से लागू की जा रही है।

 

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