Bihar Board Class 8 chapter 23
(जाड़े की रात………….. से मत, मत रो, नन्हें हिरण)
भावार्थ – कवि ने देखा एक हिरण का छोटा बच्चा खेलने के चक्कर – में मस्त होकर राह भटककर पहाड़ पर रो रहा है। उसके आँखों में माँ से बिछुड़ने की वेदना है। कवि उस छोटे हिरन छौने से कहता है। अरे हिरन-शावक मत रोओ, सो जाओ, तेरी माँ तुझे अवश्य मिलेगी।
बाँस के वन में अकवन के वन में रात की ठंडी हवा तुझे लोरी सुनाकर सुलायेगी। बेहिचक सो जा।
ऊपर आकाश में तारे, नीचे गिरे नरम-नरम पत्ते के ढेर पर सो जा । सुबह होते ही जब सूर्योदय होगा, किरणें फैल जायेगी तो तुम्हारी माँ तुझे मिले जायेगी।
