विचार बिंदु – 1. प्रस्तावना, 2. दीपावली कब और क्यों मनाते हैं लाभ-हानि, 4. निष्कर्ष।
विचार बिंदु – दीपावली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।
प्रस्तावना– दीपावली अर्थात ‘रोशनी का त्योहार’ शरद ऋतु में हर वर्ष
दीपावली कब और क्यों मनाते हैं?-
भारत में प्राचीनकाल से दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारी आरंभ हो जाती है। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई कार्य आरम्भ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाजार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नजर आते हैं। दीपावली के दिन धन एवं ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी की पूजा होती है, शाम को लोग दीये जलाते हैं, पटाखे फोड़ते हैं एवं एक-दूसरे को मिठाइयाँ बाँटते हैं।
दीपावली मनाने की परम्परा भगवान राम की लंका विजय से है। इसी दिन चौदह वर्षों का वनवास समाप्त कर श्रीराम अयोध्या लौटे थे। उनकी वापसी पर अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी। वह कार्तिक मास की अमावस्या का दिन था।
लाभ-हानि-अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह पर्व समाज में उल्लास, भाई-चारे व प्रेम का संदेश फैलाता है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं।
अंधकार की माता का प्रकाश उठे।
दीपावली के अवसर पर घर तथा आस-पास के परिवेश को विशेष रूप से स्वच्छ किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
दीपावली के अवसर पर, वायु प्रदूषण एवं ऊर्जा की अपव्यय की समस्याओं का हमें संज्ञान लेना चाहिए। विशेष रूप से, आतिशबाजी से उत्पन्न होने वाले धुआँ एवं ध्वनि प्रदूषण को घटाने के लिए हमें सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, घरों और सड़कों की रोशनी के लिए बिजली की अधिकता का उपयोग करने के बजाय, हमें ऊर्जा-कुशल प्रकाश स्त्रोतों का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं, जो कि समाज के लिए ठीक नहीं है। हमें ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए और उचित आचरण दिखाना चाहिए।
निष्कर्ष दीपावली सामूहिक व व्यक्तिगत दोनों तरह से मनाए जाने वाला ऐसा विशिष्ट पर्व है जो धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक विशिष्टता रखता है। दीपावली के नाम से हम सभी यही कामना करें कि समस्त देशवासी धन-धान्य से पूर्ण हों और सभी सुखी हों।