Bihar Board Class 8 Hindi ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से
प्रश्न-अभ्यास
पाठ से
प्रश्न 1. वकील साहब सुखी क्यों नहीं हैं ? उत्तर:
वकील साहब को धन-सम्पत्ति सुन्दर घर मृदुभाषिणि पत्नी पुत्र-पुत्री किसी चीज की कमी नहीं है लेकिन वे सुखी नहीं हैं क्योंकि उनके हृदय में ईर्ष्या रूपी आग सदैव पीड़ा पहुंचा रही है । उनके बगल का एक बीमा एजेन्ट की चमक-दमक, आमदनी गाड़ी इत्यादि सभी उन्हीं को क्यों नहीं हो जाता है। अर्थात् किसी दूसरे को सुख-सुविधा या आय क्यों ? ईर्ष्या के कारण वे सदैव चिन्तित और दुखी रहा करते । उन्हें सब सुख रहते हुए भी सुख नहीं ।
Class 8 Hindi ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से
प्रश्न 2. ईर्ष्या को अनोखा वरदान क्यों कहा गया है ? उत्तर:
ईर्ष्या को अनोखा वरदान इसलिए कहा गया है कि जिसके हृदय में यह अपना घर बना लेता है उसको प्राप्त सुख के आनन्द से वंचित कर देता है। ऐसा व्यक्ति जिसके हृदय में ईर्ष्या होती उसे अप्राप्त सुख दंश की तरह दर्द देता है। ईर्ष्या उसे अपने कर्तव्य-मार्ग से विचलित कर देता है जो ईर्ष्या की अनोखा वरदान है।
3. ईर्ष्या की बेटी किसे और क्यों कहा गया है ? उत्तर:
ईर्ष्या की बेटी निंदा को कहा गया है। जिसके पास ईर्ष्या होती वह ही दूसरों की निंदा करता है। ईर्ष्यालु व्यक्ति सोचता है कि अमुक व्यक्ति यदि आम लोगों के नजर से गिर जाय तो उसका स्थान हमें प्राप्त हो जायेगा। इस प्रकार निंदा ईर्ष्यालु व्यक्ति का सहायक बनकर ईर्ष्या रूपी आग को और भी अधिक बढ़ा देती है। इसीलिए तो निंदा को ईर्ष्या की बेटी कही गई है।
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प्रश्न 4. ईर्ष्यालु से बचने के क्या उपाय हैं ? उत्तर:
ईर्ष्यालु व्यक्ति सभ्य सज्जन और निर्दोष व्यक्ति की भी निंदा करता है। ईर्ष्यालु उसे समाज में नीचा दिखना चाहता है तो ऐसे अवस्था में उस सज्जन व्यक्ति को चाहिए कि वह अपनी कमजोरी को देखें और उसे दूर कर उसे प्रभावित करें कि ईर्ष्यालु व्यक्ति के हृदय में स्थित ईर्ष्या निकल जाय । यही उससे बचने का उपाय है।
प्रश्न 5. ईर्ष्या का लाभदायक पक्ष क्या हो सकता है? उत्तर:
ईर्ष्या से स्पर्धा होती है। जब स्पर्धा की बात ईर्ष्या से होती है तो वह आदमी अपने कर्म बदौलत अपने प्रतिद्वन्दी को पछारना चाहता है। इससे ईर्ष्यालु व्यक्ति में उन्नति होता है । इस प्रकार स्पर्धा ईर्ष्या का लाभदायक पक्ष साबित हो सकता है। पाठ से आगे
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ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से Summary in Hindi
“दिनकर” जी के घर के बगल में एक वकील साहब हैं। वे बाल-बच्चे नौकर-चाकर, धन-वैभव मृदुभाषिणी पत्नी सब प्रकार से सुखी है।लेकिन वे सुखी नहीं हैं। उनको बगल के बीमा एजेंट से ईर्ष्या है कि एजेंट की मोटर उसका मासिक आय सब कुछ उनको होता। .ईर्ष्या को एक अनोखा वरदान है कि जिसके हृदय में यह अपना घर बनाता है उसको प्राप्त सुख के आनन्द से वंचित कर देता है। दूसरों से अपने की तुलना कर अप्राप्त सुख का अभाव उसके हृदय पर दंश दर्द के समान दुख देता है। अपने अभाव को दिन-रात सोचते-सोचते अपना कर्त्तव्य भूल जाना दूसरों को हानि पहुँचाना ही श्रेष्ठ कर्त्तव्य मानने लगता है।ईर्ष्या की बड़ी बेटी निंदा है जो हरेक ईर्ष्यालु मनुष्य के पास होता है।’ इसीलिए तो ईर्ष्यालु मनुष्य दूसरों की निंदा करता है । वह सोचता है कि अमुक व्यक्ति यदि आम लोगों के आँखों से गिर जायेगा तो उसका स्थान हमें प्राप्तलेकिन ऐसा नहीं होता। दूसरों को गिराकर अपने को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है तथा कोई भी व्यक्ति निंदा से गिरता भी नहीं। निंदा निंदक के सदगणों को ह्रास कर देता है। जिसकी निंदा की जाय उसके सद्गुणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। निंदा का काम जलाना है वह सबसे पहले उसी को जलाती है जिसके हृदय में वह जन्म लेती है। कुछ लोग समाज में ऐसे होते हैं जो किसी की निंदा लोगों को सुनाने के लिए मँडराते रहते हैं। जैसे ही उनकी निंदा को सुनने वाला दिखाई पड़ा, बस उनके हृदय का ग्रामोफोन बज उठता है तथा वे अपना सम्पूर्ण काण्ड होशियारी से सुना देते हैं। । ईर्ष्यालु व्यक्ति जब से दूसरों की निंदा करने का कार्य प्रारम्भ करता हैवह उदास देखता है। – अगर आप यह कहते हैं कि-निंदा रूपी वाण से अपने प्रतिद्वंद्वियों को आहत कर हँसने में मजा आता है तो वह हँसी मनुष्य की नहीं बल्कि राक्षस की होती है और वह आनद दैत्यों की होती है।निंदा करने वाले लोग आपके सामने प्रशंसा और पीछे निंदा । ऐसे लोग सदैव अपने प्रतिद्वंद्वियों के बारे में ही सोचा करते हैं । जो व्यक्ति महान चरित्र के होते हैं ऐसे व्यक्ति का हृदय निर्मल और विशल होता है वे अपनी निंदा की परवाह ही नहीं करते हैं।