Class 12th geography part 2 chapter 6 ( जल संसाधन )

Class 12th geography part 2 chapter 6 

Class 12th geography part 2 chapter 6
• लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions) A)
1. जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए चार महत्त्वपूर्ण सुझाव दें। (2013A)
जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए चार महत्त्वपूर्ण सुझाव इस प्रकार हैं- 1. (i) घरों से निकले कचरों को नदी, तालाब इत्यादि में नहीं फेंकना चाहिए। (ii) कारखानों से निकले अपशिष्टों एवं मलजल को बिना शोधित किए नदियों, झीलों या तालाबों में विसर्जित नहीं करना चाहिए। (iii) नगरपालिकाओं को सीवर शोधन संयंत्रों की व्यवस्था करनी चाहिए। (iv) जल प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित उपयोगी और कारगर कानून बनाना चाहिए और उसे सख्ती से लागू करना चाहिए।
2. जल संसाधन का संरक्षण जरूरी है। क्यों? [2014A
. तीव्र गति से जनसंख्या की वृद्धि उसकी माँग तथा जल के असमान वितरण के कारण जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता दिनों दिन कम होती जा रही है। इतना ही नहीं, सीमित उपलब्ध जल संसाधन औद्योगिक, कृषि और घरेलू निस्सरणों से प्रदूषित होता जा रहा है और जल की गुणवत्ता में हास हो रहा है। इस कारण उपयोगी जल संसाधनों की उपलब्धता और सीमित होती जा रही है। लगभग 90% जल का उपयोग सिंचाई के लिए होता है। भारत के लगभग सभी राज्यों में सिंचित क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं के लिए संतुलित तथा पर्याप्त जल आपूर्ति के लिए जल का संरक्षण जरूरी है।
3. भारत में घटते जल संसाधन के लिए उत्तरदायी दो कारकों का उल्लेख करें। (2016A) 
भारत में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के लिए सभी क्षेत्रों में पानी की माँग बढ़ रही है। जल की माँग पेयजल और उद्योगों के अतिरिक्त सिंचाई में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ रही है। वर्तमान समय में धरातलीय जल का 89% और भूमिगत जल का 92% जल का उपयोग सिंचाई और कृषि में हो रहा है। यही कारण है कि देश में जल संसाधनों में तेजी से कमी आ रही है। देश में औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1951 में 5177 घनमीटर थी, जो घटकर 2001 में 1829 घनमीटर रह गयी और यही स्थिति रही तो 2025 में यह 1342 घन मीटर रह जाएगी। 1000 घनमीटर औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता पर जल संकट पैदा हो जाता है।
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4. बारानी या वर्षा आधारित कृषि से आप क्या समझते हैं? [2016A)
बारानी या वर्षा आधारित कृषि उस कृषि को कहते हैं, जिसमें सिंचाई का सहारा नहीं लिया जाता है और केवल वर्षा के सहारे खेती की जाती है। इसके दो प्रकार हैं-शुष्क भूमि कृषि और आर्द्र भूमि कृषि। भारत में 75 सेमी से कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्र में रागी, बाजरा, मूँग, चना, ज्वार इत्यादि शुष्कता को सहने में सक्षम फसलें उगाई जाती हैं। इन क्षेत्रों में आर्द्रता संरक्षण तथा वर्षा जल के प्रयोग की अनेक विधियाँ अपनाई जाती है। आर्द्र कृषि के अंतर्गत वर्षा ऋतु में चावल, जूट, गन्ना इत्यादि खेती वर्षा पर आधारित होती है।
5. उत्तरी भारत में सिंचाई के मुख्य साधन क्या हैं? (20174) 
उत्तरी भारत में सिंचाई के मुख्य साधन नहर, कुआँ और नलकूप हैं। इनमें नहर द्वारा सिंचाई का विशेष महत्त्व है। समतल और मुलायम चट्टानों की उपस्थिति, विस्तृत कृषि उपजाऊ भूमि, कम गहराई में, नदी से या अन्य जल-स्रोत से जल की पर्याप्त पूर्ति के कारण उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार इत्यादि राज्यों में इन साधनों से सिंचाई होती है।
6. भारत के किन्हीं चार प्रमुख सूखा संभावी राज्यों के नाम लिखिए ॥ 2018A]
भारत के चार प्रमुख सूखा संभावी राज्य निम्न हैं (1) आंध्र प्रदेश, (ii) कर्नाटक, (iii) मध्य प्रदेश, (iv) गुजरात।
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7. जल संभरण प्रबंधन क्या है? [2024A, 2021A)
जल-संभरण प्रबंधन से तात्पर्य सतही और भौम जल संसाधनों के दश्व प्रबंधन से है। इसके अंतर्गत बहते जल को रोकना और अन्तः स्रवण तालाय, पुनर्भरण, कुँओं आदि विभिन्न विधियों से भूमिगत जल का संचयन और पुनर्भरण शामिल है। विस्तृत अर्थ में जल संभरण प्रबंधन के अंतर्गत सभी संसाधनों-प्राकृतिक (जैसे भूमि, जल, पौधे और प्राणी) और जल संभरण सहित मानवीय संसाधनों के संरक्षण, पुनरूत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग को सम्मिलित किया जाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है और यह संप्रदाय के सहयोग पर निर्भर करता है।
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8. जल संरक्षण के लिए किन्हीं चार विधियों का सुझाय दीजिए। (20220)
जल मानव के अस्तित्व के लिए बेहतर प्राकृतिक मूल्यवान संसाधन है। इसके माँग और आपूर्ति में संतुलन कायम रखने के लिए जल का संरक्षण जरूरी है। (1) जल के पुनःचक्र और पुनः उपयोग कम गुणवता वाले जल का उपयोग उद्योगों में, बागवानी में इत्यादि। (ii) जल संभर प्रबंधन- प्रवाहित जल को रोकना और भूमिगत जल के भंडार में वृद्धि करना। (III) हरियाली परियोजना, नीरु-मीरू और अरवारी पानी संसद इत्यादि के द्वारा जल का संरक्षण किया जा रहा है। (iv) रिचार्ज पिट द्वारा वर्षा जल संग्रहण। सरकार के राष्ट्रीय जल नीति का जन-जन तक प्रसार करना।
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9. वर्षा जल संग्रहण तकनीक क्या है? (20230)
रिचार्ज पिट् द्वारा वर्षा जल संग्रहण किया जाता है। इस विधि में घर से 8-10 मीटर की दूरी पर धरातल के समीप 1 से 2 मीटर चौड़ा तथा 2 से 3 मीटर गहरा गड्‌ढा बना दिया जाता है। इस पिट की तली पर गिट्टी तथा उसके ऊपर बजरी तथा सबसे ऊपर मोटी बालू की परतें बिछा दी जाती है। छत से एक पाइप बिछाते हुए उसका सम्पर्क इस रिचार्ज पिट से कर दिया जाता है। इस प्रकार से वर्षा होने पर घर की छतों की समस्त वर्षों जल पाइप के माध्यम से रिचार्ज पिट में चला जाता है।
10. भारत में पेयजल संकट के कारणों को स्पष्ट करें। (20248)
भारत में पेयजल संकट के कारण निम्नलिखित हैं- (i) भूमिगत जल स्तर का अत्यधिक विदोहन के कारण जल-स्तर का लगातार गिरना। (ii) सतही जल के साथ-साथ भूमिगत जल का प्रदूषित होना। (iii) जल संग्रहण प्रणाली का अभाव। (iv) वर्षा जल का बेकार बह जाना।
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वीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
1. भारत की गंगा और यमुना दो सर्वाधिक प्रदूषित नदियाँ हैं। कैसे? इस कथन का परीक्षण करें। [2014A [2016A) 2. भारत में सिंचाई की आवश्यकता है। क्यों?
प्राकृतिक या मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप जल को गुणवत्ता में हुए निम्नीकरण को जल-प्रदूषण कहा जाता है, जो आहार, मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य, कृषि, मछली पालन या मनोरंजन के लिए अनुपयुक्त या खतरनाक होते हैं। भारत में जनसंख्या की वृद्धि तथा औद्योगिक विस्तार के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से नदियों, नहरों, झीलों तथा तालाबों में जल की गुणवत्ता में बहुत अधिक निम्नीकरण हुआ है। जल में स्वतः शुद्धिकरण की क्षमता नहीं रह गयी है और यह उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। जल प्रदूषण प्राकृतिक (अपरदन, भूस्खलन, पेड़-पौधे और मृत पशु के सड़ने-गलने) और मानवीय (कृषि, उद्योग और सांस्कृतिक गतिविधि) स्रोतों से होता है। इनमें उद्योग सबसे बड़ा प्रदूषक है। उद्योगों के अवांछनीय उत्पाद जैसे औद्योगिक कचरा, प्रदूषित अपशिष्ट जल, जहरीली गैखें, रासायनिक अवशेष इत्यादि बहते जल या झीलों में बहा दिये जाते हैं, जिससे जल प्रदूषित हो जाता है। चमड़ा उद्योग, कागज और लुग्दी उद्योग, वस्त्र तथा रसायन उद्योग सर्वाधिक जल प्रदूषक हैं। कानपुर और मोकामा का चमड़ा उद्योग गंगा को और दिल्ली का विविध औद्योगिक कचरा यमुना को प्रदूषित कर रहा है। इसी प्रकार कृषि में अकार्बनिक उर्वरक, कीटनाशक इत्यादि के उपयोग से भी जल प्रदूषण होता है। ये प्रदूषक जल के साथ भू-जल तक पहुँच जाते हैं और धरातलीय जल के साथ-साथ भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर देते हैं। घरेलू कचरा और अपशिष्ट तथा नदी में लाशों के विसर्जन से भी जल प्रदूषण होता है। कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना तथा कोलकाता के घरेलू कचरे गंगा और हुगली को तथा दिल्ली का घरेलू कचरा यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। जल प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की जल-जनित बीमारियाँ, जैसे- दस्त, आँतों की कृमि, हेपेटाइटिस इत्यादि होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग एक चौथाई संचारी बीमारी जल-जनित होती है।
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