class 12th geography chapter 7 part 2 ( खनिज तथा उर्जा संशाधन )

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1. भारत में पवन ऊर्जा के विकास पर एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें। (2013A]

भारत में पवन ऊर्जा के विकास की अपार संभावनाएँ हैं। स्थायी वायु प्रणालियों और मानसून पवनों को ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है। इनके अतिरिक्त स्थानीय हवाओं, स्थलीय और जलीय पवनों को भी विद्युत पैदा करने के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। भारत के तटीय भागों में पवन तेज गति से चला करते हैं। अतः इसके पास एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसमें 45 मेगावाट की कुल क्षमता के लिए 250 वायुचालित टरबाइने स्थापित की जानी है जो 12 अनुकूल सागरतटीय क्षेत्रों में लगाई जाएगी। इससे भारत 3000 मेगावाट विद्युत का उत्पादन कर सकेगा। खनिज तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए पवन ऊर्जा को विकसित किया जा रहा है।

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2. नोएडा एवं बरौनी के महत्त्व का उल्लेख करें । [2013A]

नोएडा गुड़गाँव-दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है जो दिल्ली से सटे स्थित है। यह छोटे और बाजार उन्मुख विद्युत, इंजीनियरिंग के हल्के सामान और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में महत्त्वपूर्ण हैं। यह सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक में अपनी पहचान बना चुका है। बरौनी बिहार में गंगा नदी के उत्तर स्थित है। यह दक्षिण और मध्य बिहार से राजेन्द्र पुल से जुड़ा हुआ है। यह एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्र है, जहाँ तेलशोधक कारखाना, पेट्रो रसायन, ताप विद्युत, रासायनिक खाद और दुग्ध उद्योग विकसित है। यह उत्तर बिहार का एक महत्त्वपूर्ण रेलवे जंक्शन भो हैं।

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3. परमाणु ऊर्जा कैसे पैदा की जाती है? [2014A]

परमाणु के विखंडन द्वारा परमाणु ऊर्जा पैदा की जाती है। इसे नाभिकीय ऊर्जा भी कहा जाता है, जो परमाणु के नाभिक में परिवर्तन लाकर प्राप्त की जाती है। परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले महत्त्वपूर्ण खनिज यूरेनियम, थोरियम, वैनेडियम, एंटीमनी, ग्रेफाइट इत्यादि हैं। ये खनिज भारत के विभिन्न भागों में पाये जाते हैं। इनपर आधारित कई परमाणु ऊर्जा केन्द्र देश में स्थापित किए गए हैं, जिनमें तारापुर (महाराष्ट्र), रावत भाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (उत्तर प्रदेश), कैगा (कर्नाटक) और ककरापाड़ा (गुजरात) मुख्य हैं।

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4. खनिज आधारित उद्योगों से आप क्या

खनिज आधारित उद्योग उस उद्योग को कहते हैं जिसमें कच्चा माल के रूप में खनिजों का इस्तेमाल होता है। जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग इत्यादि। लोहा-इस्पात उद्योग में लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, चूना पत्थर इत्यादि का प्रयोग होता है। सीमेंट उद्योग में चूना पत्थर का उपयोग होता है।

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5. दामोदर बेसिन में स्थित चार कोयला खानों के नाम लिखिए। [2018A]

दामोदर बेसिन में स्थित चार कोयला खानों के नाम निम्न हैं- (i) झरिया, (ii) रानीगंज, (iii) बरकाकाना, (iv) विद्यावती।

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6. ऊर्जा के नवीनीकृत तथा अनवीनीकृत साधनों में अंतर स्पष्ट करें।

सतत् पोपणीय ऊर्जा के स्रोत को नवीनीकृत साधन कहते हैं। इन्हें अपरम्परागत स्रोत भी कहा जाता है। सौर, पवन, जल, भूतापीय ऊर्जा तथा जैवमार (बायोमास) असमाप्य, समान रूप से वितरित तथा पर्यावरण अनुकूल हैं और इन्हें नवीनीकृत करके बार-बार उपयोग किया जा सकता है। इसके विपरीत कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा नाभिकीय ऊर्जा अनवीनीकृत तथा परम्परागत स्रोत हैं, जो समाप्य संसाधन हैं। एक बार प्रयोग करने के बाद ये समाप्त हो जाते हैं।

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 7. भारत के चार प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम लिखें। [2020A)

भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम निम्नलिखित हैं- (i) तारापुर (महाराष्ट्र), (ii) रावतभाटा (कोटा के समीप राजस्थान), (iii) कलपक्कम (तमिलनाडु), (iv) नरोरा (उतरप्रदेश), (v) कैगा (कर्नाटक) और (vi) ककराणाड़ा (गुजरात)। इस समय इन छः केंद्रों पर स्थित 14 युनिटों से परमाणु ऊर्जा पैदा की जा रही है। ये केवल 16.9 अरब कि॰वाट ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं। यह भारत में उत्पादित कुल ऊर्जा का मात्र 3.4% है, परन्तु भविष्य में इसमें तीव्र गति से वृद्धि होने की संभावना है।

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8. भारत के चार लौह अयस्क उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए। 1202/A1

. भारत के चार प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक राज्य हैं- गोवा, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़।

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9. ऊर्जा के दो अनवीकरणीय स्रोतों का उल्लेख कीजिए। (20230)

9.पुनर्डपयोग नहीं किया जा सकता है। मुख्य रूप से कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा को अनवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत कहा जाता है। वर्तमान में विश्व का 90% ऊर्जा उत्पादन इसी से किया जाता है। इसकी महत्ता औद्योगिक विश्व के लिए अधिक है लेकिन स्रोत सीमित होने के कारण यह अब खत्म होने के कगार पर है।

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10. भारत के चार कोयला क्षेत्रों के नाम लिखिए। (20240)

भारत में चार कोयला क्षेत्र निम्न हैं- (i) झरिया, (ii) रानीगंज, (iii) सिंगरौली, (iv) तालचेर

11. भारत के चार मैंगनीज उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए। (2025A/

भारत में मैंगनीज उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं- (i) कर्नाटक, (ii) ओडिशा, (ii) मध्य प्रदेश, (iv) महाराष्ट्र

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

1. ऊर्जा के अपारम्परिक स्रोत कौन से हैं? भारत में इसकी संभावनाओं की चर्चा करें। [2025A, 2021A)

ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत सूर्य, पवन, ज्वार और लहरें, भू-ताप और जैविक उत्पाद हैं। इनसे प्राप्त ऊर्जा को क्रमशः सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय और तरंग ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा और जैव-ऊर्जा कहते हैं। ये सभी ऊर्जा के सतत पोषणीय स्रोत हैं, ये कभी खत्म नहीं हो सकते और इनका नवीकरण होता रहता है। ये ऊर्जा स्रोत समान रूप से वितरित तथा पर्यावरण अनुकूल है। इन स्रांतों का आरंभिक लागत अधिक होता है, किंतु इसके बावजूद ये अधिक टिकाऊ, पारिस्थितिक अनुकूल तथा सस्ती ऊर्ज उपलब्ध कराते हैं। भारत में ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत विपुल हैं और इनका भविष्य उज्ज्वल है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत में ऊर्जा के इन स्रोतों की अनुमानित उत्पादन क्षमता 93000 मेगावॉट है। इनमें से कुछ का ही भारत में उपयोग होता है। सौर ऊर्जा ऊष्ण कटिबंध में स्थित होने के कारण भारत में सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता और उपयोगिता की अधिक संभावना है। यहाँ प्रति वर्ग किमी० क्षेत्र में 20 मेगावाट प्रतिवर्ष सौर ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। देश के विभिन्न भागों में सौर ऊर्जा बहुत लोकप्रिय हो रही है। इसका उपयोग खाना बनाने, पम्प द्वारा जल निकालने, पानी को गर्म करने तथा रोशनी के लिए किया जा रहा है। भारत में सबसे बड़ा सौर संयंत्र भुग (गुजरात) में लगाया गया है। राजस्थान के थार मरुस्थल में इसके विकास की अधिक संभावनाएँ हैं। पवन ऊर्जा भारत में लगभग 23000 मेगावॉट पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता है। देश में लगभग 90 स्थानों की पहचान पवन ऊर्जा केन्द्र के रूप में की गई है। ये स्थान गुजरात, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और लक्षद्वीप में स्थित हैं। गुजरात के कच्छे में लाम्बा का पवन ऊर्जा एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र है। ज्वारीय ऊर्जा-भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर इसके विकास को संभावनाएँ हैं। कच्छ और खंभात की खाड़ियों में, जहाँ ऊँचे ज्वार उठते हैं, ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।

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