अक्षरज्ञान प्रश्नोत्तर : Akshar Gyaan Subjective Question Answer

अक्षरज्ञान प्रश्नोत्तर : Akshar Gyaan Subjective Question Answer

1. लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. कविता में तीन उपस्थितियाँ कौन-कौन सी हैं? स्पष्ट करें।

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उत्तर: कविता में प्रवेश, बोध और विकास—ये तीन उपस्थितियाँ आई हैं:

  • प्रवेश: यह वातावरण की प्रारंभिक स्थिति है, जहाँ बालक चौखट और स्लेट के माध्यम से ‘क’, ‘ख’ लिखने का प्रयास शुरू करता है।

  • बोध: इसमें थोड़ी परिपक्वता आती है। बालक अक्षरों को प्रतीकों (कबूतर, खरगोश) से जोड़कर समझने लगता है, जिससे उसमें कौतूहल जगता है।

  • विकास: यह अंतिम चरण है, जहाँ निरंतर प्रयास और संघर्ष के बाद बालक अक्षर को मूर्त रूप देने में सफल हो जाता है।

प्रश्न 2. कविता में ‘क’ का विवरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कविता में बालक के प्रारंभिक अक्षर-बोध का सुंदर चित्रण है। बालक जब ‘क’ लिखने का प्रयास करता है, तो अभ्यास-पुस्तिका की चौखट उसके लिए छोटी पड़ जाती है।

  • प्रतीकात्मक अर्थ: ‘क’ को ‘कबूतर’ मानकर बच्चे को सहजता से सिखाने का प्रयास किया जाता है।

  • कबूतर की चंचलता बालक के चंचल मन और फुदकने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

प्रश्न 3. खालिस बेचैनी किसकी है? बेचैनी का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ‘खालिस बेचैनी’ खरगोश की है।

  • जब बालक ‘क’ सीखकर ‘ख’ सीखने के मार्ग पर बढ़ता है, तो उसकी जिज्ञासा और तीव्र हो जाती है। खरगोश की चंचलता के माध्यम से ‘ख’ को आसानी से सिखाया जाता है।

  • बेचैनी का अभिप्राय: नया ज्ञान प्राप्त करने की तीव्र लालसा, जिज्ञासा और कर्म में आगे बढ़ने का उत्साह।

प्रश्न 4. बेटे के लिए ‘ङ’ क्या है और क्यों?

उत्तर: बेटे के लिए ‘ङ’ माँ की गोद में बैठा हुआ बच्चा है (‘ड’ को माँ और उसके बगल के बिंदु (.) को बेटा माना गया है)।

  • ‘क’ से ‘घ’ तक सीखने के बाद जब बालक कठिनाइयों से थक जाता है, तब ‘ङ’ पर आकर उसे ठहराव और सांत्वना मिलती है।

  • यह ठहराव माँ के वात्सल्य और स्नेह की गोद के समान है, जहाँ बालक को संबल मिलता है।

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प्रश्न 5. बेटे को आँसू कब आते हैं और क्यों?

उत्तर: ‘क’ से लेकर ‘घ’ तक सीखने के बाद जब बालक ‘ङ’ को साधने का प्रयास करता है, तो वह बार-बार विफल होता है। पहली बार विफलता का सामना करने पर उसकी आँखों में छलकते हुए आँसू आ जाते हैं।

  • ये आँसू हार मानने के नहीं, बल्कि असफलता से जूझने और संघर्ष के प्रथमाक्षर हैं।

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प्रश्न 6. कविता के अंत में कवयित्री ‘शायद’ अव्यय का प्रयोग क्यों करती हैं?

उत्तर: कवयित्री ‘शायद’ शब्द का प्रयोग यह दर्शाने के लिए करती हैं कि जिस प्रकार एक बच्चे को अक्षर-ज्ञान सीखने में भारी मशक्कत और संघर्ष करना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार पूरी सृष्टि के विकास की शुरुआत में भी मानव को ऐसा ही संघर्ष करना पड़ा होगा। यह मानव सभ्यता के विकास-क्रम की ओर संकेत करता है।

प्रश्न 7. कविता किस तरह एक सांत्वना और आशा जगाती है?

उत्तर: कविता सिखाती है कि असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है। बालक बार-बार गिरता है, अक्षर बिगड़ते हैं, लेकिन माँ की ममता और सांत्वना उसे पुनः प्रयास करने की प्रेरणा देती है। यह कविता संदेश देती है कि जीवन-पथ पर आने वाली बाधाओं के बावजूद निरंतर प्रयास से अंततः सफलता प्राप्त होती है।

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प्रश्न 8. व्याख्या करें: “गमले-सा टूटता हुआ उसका ‘ग’, घड़े-सा लुढ़कता हुआ उसका ‘घ’।”

उत्तर:

  • प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्य-पुस्तक के ‘अक्षर-ज्ञान’ शीर्षक पाठ से उद्धृत हैं, जिसकी रचयिता समकालीन कवयित्री अनामिका हैं।

  • व्याख्या: इन पंक्तियों में कवयित्री ने बच्चे के अक्षर सीखने की कौतुकपूर्ण और संघर्षमय प्रक्रिया को दर्शाया है।

    • बालक जब ‘ग’ लिखता है, तो उसका ध्यान ‘गमले’ पर चला जाता है और अक्षर गमले की तरह टूट जाता है।

    • जब वह ‘घ’ लिखने की कोशिश करता है, तो ‘घड़े’ की कल्पना में अक्षर घड़े की तरह लुढ़क जाता है।

    • भावार्थ: असफलता के इन छोटे-छोटे झटकों से ही बालक धीरे-धीरे सही उच्चारण और लेखन सीखता है।

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प्रश्न 9. ‘अक्षर-ज्ञान’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर: कवयित्री अनामिका द्वारा रचित ‘अक्षर-ज्ञान’ कविता में बच्चे द्वारा अक्षर सीखने की प्रारंभिक प्रक्रिया और उसके माध्यम से मानव-जीवन के विकास की संघर्ष-कथा को उकेरा गया है।

माँ जब बच्चे को स्लेट देकर ‘क’, ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ सिखाना शुरू करती है, तो बालक अक्षरों को चित्रों और वस्तुओं से जोड़ता है:

  1. ‘क’ से कबूतर (जो चौखट में नहीं अँटता),

  2. ‘ख’ से खरगोश (जिसकी बेचैनी में फुदक जाता है),

  3. ‘ग’ से गमला (जो टूट जाता है),

  4. ‘घ’ से घड़ा (जो लुढ़क जाता है)।

असली चुनौती आती है ‘ङ’ पर। बच्चा ‘ङ’ के ‘ड’ को माँ और बिंदु को उसकी गोद में बैठा बेटा समझता है। बार-बार प्रयास करने पर भी जब ‘ङ’ नहीं सधता, तो निराशा में बच्चे की आँखों में आँसू छलक आते हैं।

निष्कर्ष: ये आँसू हार के नहीं, बल्कि असफलता पर विजय पाने के संकल्प के हैं। कवयित्री का मानना है कि ये आँसू ही ‘सृष्टि के विकास-कथा के प्रथमाक्षर’ हैं। जीवन में संघर्ष ही मनुष्य की नियति है, और असफलता से न हारकर आगे बढ़ना ही वास्तविक विकास है।

Akshar Gyaan Subjective Question

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