धुल, धुआँ, गैसें इत्यादि संदूषकों की वायु में अभिवृद्धि से मनुष्यों, जन्तुओं और पेड़-पौधों के लिए हानिकारक होते हैं, वायु प्रदूषण कहलाते हैं। वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत प्राकृतिक और मानवकृत हैं। ज्वालामुखी विस्फोट, धूल, तूफान, अग्नि इत्यादि प्राकृतिक स्त्रोत हैं, जबकि उद्योग, मोटरवाहन, ताप बिजलीघर, शहरी कचरा, खदानों से निकली धूल इत्यादि मानवकृत स्रोत हैं। वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे फेफड़ों, हृदय, स्नायुतंत्र, परिसंचरण तंत्र तथा त्वचा से संबंधित रोग होते हैं।
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2. पर्यावरणीय निश्चयवाद की अवधारणा को लिखें। [2014]
मानव प्राचीनकाल से ही अपने भौतिक पर्यावरण के साथ संबंध रखता है। प्राकृतिक पर्यावरण की आरंभिक अवस्थाओं में मानव प्रकृति से अधिक प्रभावित हुआ और उसके आदेशों के अनुसार उसने अपने आपको ढाल लिया। इसका कारण यह है कि प्रौद्योगिकी का स्तर अत्यंत निम्न था और मानव के विकास की अवस्था भी आदिम थी। आदिम मानव समाज और प्रकृति की प्रबल शक्तियों के बीच के संबंध को पर्यावरणीय निश्चयवाद या नियतिवाद (Environmental Determinism) कहा गया। इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य के सभी क्रिया कलाप उसके पर्यावरण द्वारा नियंत्रित होते हैं। धरातल की आकृति, नदी, जलाशय, जलवायु, वनस्पति और जीव-जंतु इत्यादि भौतिक पर्यावरण ही मनुष्य के समाज, खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा, मकान तथा उसके विचार को निर्धारित करता है। इस विचारधारा में मनुष्य निष्क्रिय तथा प्रकृति सक्रिय होती है।
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3. स्मॉग क्या होता है? [2014A] A
वायुमंडल में धुआँ और कुहासा के मिलने से धुँआसा का निर्माण होता है, जिसे अंग्रेजी में स्मॉग (smog = smoke + fog) कहते हैं। जाड़े के दिनों में वायुमंडल की निचली तल में कुहासा छाया रहता है। ऊर्जा के स्रोत के रूप में विभिन्न प्रकार के ईंधनों के प्रयोग में वृद्धि के साथ, पर्यावरण में विषाक्त धुएँ वाली गैसों के उत्सर्जन के परिणामस्वरूप स्मॉग का निर्माण होता है। यह मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक होता है।
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4. पारिस्थितिकीय असंतुलन को प्रभावित करने वाले दो कारकों का उल्लेख करें। [2015A) Al
पृथ्वी एक विशाल पारिस्थितिक तंत्र है। यहाँ पर जैविक तथा अजैविक घटक समान रूप से एक-दूसरे से अंतक्रिया करते हैं, जिसके कारण इस पारिस्थितिक तंत्र में संरचनात्मक एवं क्रियात्मक परिवर्तन होते हैं। मानवीय क्रियाकलापों एवं उद्योगों के अपशिष्ट उत्पादों से मुक्त द्रव्य एवं ऊर्जा पर्यावरण को प्रदूषित कर देते हैं तथा परिस्थितिकीय असंतुलन पैदा कर देते हैं। पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य रूप जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वंनि प्रदूषण इत्यादि है। इस प्रकार के पारिस्थितिकीय असंतुलन को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक हैं वृक्षों की कटाई तथा जनसंख्या की तीव्र वृद्धि। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के कारण वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है, वर्षा की मात्रा कम होती जा रही है तथा वातावरण में धूलकण एवं अन्य प्रदूषक बढ़ रहे हैं। जनसंख्या की वृद्धि से घरेलू अपशिष्ट की मात्रा बढ़ रही है, अधिक अनाज उत्पादन के लिए खेतों में रासायनिक खाद भूमि प्रदूषण फैला रहे हैं तथा अधिवास और अन्य भौतिक संरचना के विस्तार के कारण वन क्षेत्र कम होते जा रहे हैं। ये सभी पारिस्थितिकीय असंतुलन पैदा करते हैं।
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5. संभववाद क्या है? [2015A)
संभववाद इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिप्रदत्त अनेक संभावनाओं का इच्छानुसार अपने लिए उपयोग कर सकता है। मानव एवं पर्यावरण के परस्पर संबंध में यह विचारधारा मानव केंद्रित है।
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6. वायु प्रदूषण के प्रमुख स्त्रोतों का उल्लेख करें। [2019A] [2018A)
धूल, धुआँ, गैसें आदि संदूषकों की वायु में अभिवृद्धि जो मनुष्यों, जन्तुओं और पेड़-पौधों के लिए हानिकारक होते हैं, वायु प्रदूषण कहलाते हैं। वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं- (1) प्राकृतिक स्रोत, जैसे ज्यालामुखी विस्फोट, धूल, तूफान, अग्नि इत्यादि तथा मानवकृत स्रोत, जैसे उद्योग, मोटरवाहन, ताप बिजली घर, शहरी कचरा, खदानों से निकली धूल इत्यादि। (II) उद्योग उद्योगों से अनेक प्रकार की जहरीली गैस, राख और धूल निकलकर वायु को प्रदूषित करती है। (III) पोटर वाहन मोटर वाहनों से मोनोक्साइड और सीसा वायुमंडल में छोड़े जाते हैं। बड़े नगरों में 50 से 60% प्रदूषण इन्हीं से होता है। (iv) ताप चिजली घर ताप बिजली घरों से गंधक, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन ऑक्साइड वायुमंडल में छोड़े जाते हैं। (v) शहरी कचरा नगरों और महानगरों में प्रतिदिन लाखों टन कचरा निकलता है। इसमें से बहुत कचरा जला दिया जाता है, जिसका घना धुआँ वायुमंडल में फैलकर उसे प्रदूषित कर देता है। (vi) खदानों से निकली धूल खदानों से और पत्थर तोड़ने से भारी मात्रा में धूल निकलकर वायुमंडल में फैल जाता है।
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7. भू-निम्नीकरण से आप क्या समझते हैं? (2025A, 2018A,2020A) AJ
. भू-निम्नीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें भूमि खेती के अयोग्य बनती है। इसके जिम्मेवार तत्त्व निम्नलिखित हैं- (i) खनन, (ii) अति पशुचारण, (iii) जलाक्रांतता, (iv) औद्योगीकरण।
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8. ध्वनि प्रदूषण के चार स्रोतों का उल्लेख करें। [2025A,2021A)
. ध्वनि प्रदूषण के चार प्रमुख स्त्रोत हैं- मोटर वाहन, लाउडस्पीकर, उद्योग और हल्ला-गुल्ला।
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9. प्रदूषण तथा प्रदूषकों में क्या अंतर है? [2023A) AJ
पर्यावरण में जीव-जन्तुओं और पेड़-पौधों के लिए हानिकारक परिवर्तन को प्रदूषण कहते हैं। पर्यावरण के विभिन्न अवयवों की एक निश्चित संरचना होती है। इन अवयवों में जब दूसरे प्रकार के पदार्थ मिल जाते हैं तथा उनकी मौलिक संरचना में हानिकारक परिवर्तन आ जाता है, इस परिवर्तन का नाम ही प्रदूषण है। पर्यावरण का अधिकतर प्रदूषण मानवीय क्रियाओं द्वारा होता है, लेकिन कुछ प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा भी होता है। प्रदूषण मुख्यतः तीन प्रकार का होता है वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण और जल प्रदूषण। पर्यावरण में विद्यमान प्राकृतिक संतुलन में हास और प्रदूषण उत्पन्न करने वाली ऊर्जा या पदार्थ के किसी भी रूप को प्रदूषक कहा जाता है। ये गैस, तरल या ठोस किसी भी रूप में हो सकते हैं। प्रदूषक विभिन्न माध्यमों द्वारा विकीर्ण तथा परिवाहित होते हैं। कारखानों का धुआँ, कूड़ा-कचरा, रसायनों वाला अपशिष्ट जल, मलजल, कृषि में प्रयुक्त कीटनाशक तथा उर्वरक, वाहनों का धुआँ इत्यादि मानवीय प्रदूषक है। ज्वालामुखी से उत्पन्न लावा, कीचड़ तथा अन्य पदार्थ, बाढ़ जल के साथ बहकर आए गाद, रेत आदि प्राकृतिक प्रदूषक है।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
1. विकासशील देशों में नगरीकरण से उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें। [2016A)
नगरीकरण सामाजिक विकास का एक महत्त्वपूर्ण मापदंड है और नगरों को आर्थिक विकास का इंजन कहा जाता है। औद्योगीकरण से नगरीकरण तथा नगरीकरण से आधुनिकीकरण एक निरंतर प्रक्रिया है। लेकिन नगरीकरण और आर्थिक विकास के बीच समन्वय अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त नगरीकरण नियोजित होना चाहिए। किन्तु विकासशील देशों में नगरीय जनसंख्या की तीव्र वृद्धि और इसके अनियोजित विकास ने सुविधाओं के साथ-साथ समस्याओं को भी जन्म दिया है। मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं- (i) ग्रामीण नगरीय प्रवास और बेरोजगारी विकासशील देशों में ग्रामीण बेरोजगारी के कारण गाँवों से महानगरों की ओर मानव प्रवास सर्वाधिक हुआ है। इन नगरों की कुल जनसंख्या वृद्धि का 40 से 50% इस प्रवास के कारण हुआ है। चूँकि विकासशील देशों में, विकसित देशों के विपरीत, नगरीकरण में वृद्धि औद्योगिक विकास के साथ-साथ नहीं हुई है, पहले से ही बेरोजगारी से ग्रस्त नगरों में बेरोजगारी की समस्या और भी गंभीर हो गई हैं। (ii) अधिक घनत्त्व (Over-crowding) पश्चिमी देशों की तुलना में इन नगरों में जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक है, जैसे कोलकाता और मुंबई के मध्यवर्ती क्षेत्रों में यह एक लाख व्यक्ति प्रतिवर्ग कि० मी० से भी अधिक है। सघन आबादी के कारण कई अन्य समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं।
2. ध्वनि प्रदूषण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [2023A]
किसी वस्तु से जनित सामान्य आवाज को ध्वनि कहते हैं। जब ध्वनि की तीव्रता अधिक हो जाती है तो इसे शोर कहते हैं। उच्च तीव्रता ध्वनि अर्थात् 85 डेसिबल या इससे अधिक की ध्वनि मनुष्यों के कानों को नुकसान पहुँचाती है। यह लाखों लोगों को प्रतिदिन प्रभावित करती है। ध्वनि प्रदूषण के स्रोत- (आई) प्राकृतिक बिजली का कड़कना, ज्वालामुखी विस्फोट, जलप्रपात इत्यादि। (ii) कृत्रिम वाहन, लाउडस्पीकर, बाजार, सिनेमागृह, डीजे इत्यादि । भारत में दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले अधिकांश नगरों में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बहुत ऊँचा हो गया है। यातायात के शोर भारतीय नगरों में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।
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3. जल प्रदूषण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। [20248]
प्राकृतिक या मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप जल की गुणवत्ता में हुए निम्नीकरण को जल-प्रदूषण कहा जाता है, जो आहार, मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य, कृषि, मछली पालन या मनोरंजन के लिए अनुपयुक्त या खतरनाक होते हैं। भारत में जनसंख्या की वृद्धि तथा औद्योगिक विस्तार के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से नदियों, नहरों, झीलों तथा तालाबों में जल की गुणवत्ता में बहुत अधिक निम्नीकरण हुआ है। इनमें निलंबित कण, कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ अधिक मात्रा में समाहित हो गये हैं, जल में स्वतः शुद्धिकरण की क्षमता नहीं रह गयी है और यह उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। जल प्रदूषण प्राकृतिक (अपरदन, भूस्खलन, पेड़-पौधे और मृत पशु के सड़ने-गलने) और मानवीय (कृषि, उद्योग और सांस्कृतिक गतिविधि) स्रोतों से होता है। इनमें उद्योग सबसे बड़ा प्रदूषक है। उद्योगों के अवांछनीय उत्पाद जैसे औद्योगिक कचरा, प्रदूषित अपशिष्ट जल, जहरीली गैसें, रासायनिक अवशेष इत्यादि बहते जल या झीलों में बहा दिये जाते हैं, जिससे जल प्रदूषित हो जाता है। चमड़ा उद्योग, कागज और लुग्दी उद्योग, वस्त्र तथा रसायन उद्योग सर्वाधिक जल-प्रदूषक हैं। कानपुर और मोकामा का चमड़ा उद्योग गंगा को और दिल्ली का विविध औद्योगिक कचरा यमुना को प्रदूषित कर रहा है। इसी प्रकार कृषि में अकार्बनिक उर्वरक, कीटनाशक इत्यादि के उपयोग से भी जल प्रदूषण होता है। ये प्रदूषक जल के साथ भू-जल तक पहुँच जाते हैं और धरातलीय जल के साथ-साथ भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर देते हैं। घरेलू कचरा और अपशिष्ट तथा नदी में लाशों के विसर्जन से भी जल प्रदूषण होता है। कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना तथा कोलकाता के घरेलू कचरे गंगा और हुगली को तथा दिल्ली का घरेलू कचरा यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। दिल्ली के निकट यमुना में 17 खुले नाले मल-जल डालते हैं। इसके अतिरिक्त तीर्थ यात्राओं, धार्मिक मेलों, पर्यटन इत्यादि सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण भी जल प्रदूषित होता है। जल प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की जल-जनित बीमारियाँ, जैसेख्खदस्त, आँतों में कृमि, हेपेटाइटिस इत्यादि होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग एक-चौथाई संचारी बीमारी जल-जनित होती है।