Bihar board 9th class sanskrit ईशस्तुति:

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पाठ 1 – ईशस्तुति: 9th class sanskrit ईशस्तुति:

अभ्यासः (मौखिकः)

1. एकपदेन उत्तरं वदत

(क) ईश्वरात् काः निवर्तन्ते?
(ख) केन सह ताः निवर्तन्ते?
(ग) ब्रह्मणः किं स्वरूपम्?
(घ) कः न बिभेति?
(ङ) तमसः कुत्र गन्तुमिच्छति?
उत्तर- (क) ईश्वरात् वाचः निवर्तन्ते। (ख) मनसा (ग) आनन्दम्।
(घ) आनन्दः ब्रह्मणः विद्वान्। (ङ) ज्योतिः।

2. एतानि पद्यानि एकपदेन मौखिक रूपेण पूरयत

(क) यतो वाचो………..। (निवर्तन्ते)
(ख) आनंद ब्रह्मणो……….। (विद्वान्)
(ग) सर्वभूतेषु…………। (गूढ:)
(घ) केवलो…………। (निर्गुणश्च)
(ङ) त्वमस्य विश्वस्य परं……। (निधानम्)

9th class sanskrit ईशस्तुति:

3. एतेषां पदानाम् अर्थं वदत-

विद्वान् = जाननेवाला, पंडित
गूढः = छिपा हुआ
बिभेति = डरता है
कुतश्चन = किसी से भी
ततम् = व्याप्त

4. स्वस्मृत्या काञ्चित् संस्कृतप्रार्थनां श्रावयत

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव
त्वमेव विद्या द्रविडं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देव देव।

अभ्यासः (लिखितः)

1. संधिविच्छेदं कुरुत

(क) कुतश्चन = कुतः + चन
(ख) ज्योतिर्गमय ज्योतिः + गमय
(ग) वेत्तासि = वेत्ता + असि
(घ) नमोऽस्तु = नमः + अस्तु
(ङ) ततोऽसि = ततः + असि

2. प्रकृति-प्रत्यय-विच्छेदं कुरुत

(क) अप्राप्य = नब् + प्र + आप् + ल्यप्
(ख) विद्वान् = विद् + शतृ
(ग) गूढः = गुह् + क्त
(घ) ततम् = तत् + क्त
(ङ) वेद्यम् = विद् + ण्यत्

3. समासविग्रहं कुरुत

(क) सर्वभूतेषु = सर्वाणि भूतानि तेषु
(ख) कर्माध्यक्षः = कर्मणाम् अध्यक्षः
(ग) अनन्तरूपः = अनन्तानि रूपाणि यस्य सः
(घ) सर्वभूताधिवासः = सर्वभूतानाम् अधिवासः
(ङ) अमितविक्रमः = अमित: विक्रमः

4. रिक्त स्थानानि पूरयत

(क) ………मा सद्गमय। (असतो)
(ख) तमसो मा …….. गमय। (ज्योति 🙂
(ग) नमः …..पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते। (पुरस्ता)
(घ) वेत्तासि …… च …. च धाम। (वेद्यम्/ परम्)

5. अधोनिर्दिष्टानां पदानां स्ववाक्येषु प्रयोगं कुरुत

(क) बिभेति = प्रवरः सर्पात् बिभेति।

(ख) निवर्तते = प्रखर: गृहात् निवर्तते।
(ग) वेत्ता = ईश्वर: वेत्ता अस्ति।
(घ) सवर्तः = ग्रामं सर्वतः पर्वता: सन्ति।
(ङ) नमः = श्रीगणेशाय नमः।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

‘ उपनिषद् ‘ से आप क्या समझते हैं? संपेक्ष में लिखें

उत्तर- उपनिषद् एक वेदांग है। यों तो इसकी संख्या 108 है; परन्तु प्रमुख रूप से 10 उपनिषदों को इस प्रकार बाँटा गया है

(1) ऐतरेय उपनिषद् – ऋग्वेद से सम्बद्ध
(11) ईशावास्योपनिषद् – शुक्लयजुर्वेद से सम्बद्ध
(111) बृहदारण्यकोपनिषद् – शुक्लयजुर्वेद से सम्बद्ध
(iv) तैत्तिरीयोपनिषद् – कृष्णयजुर्वेद से सम्बद्ध
(v) कठोपनिषद् – कृष्णयजुर्वेद से सम्बद्ध
(vi) केनोपनिषद् – सामवेद से सम्बद्ध
(vii) छान्दोग्योपनिषद् – सामवेद से सम्बद्ध
(viii) मुण्डकोपनिषद् – अथर्ववेद से सम्बद्ध
(ix) माण्डूक्योपनिषद् – अथर्ववेद से सम्बद्ध
(x) प्रश्नोपनिषद् – अथर्ववेद से सम्बद्ध
उपनिषदों में वेदों की व्याख्या की गई है। इनमें ब्रह्म, आत्मा, अद्वैत, सृष्टि, प्राण, कर्म सिद्धांत, वैराग्य, ज्ञान आदि के उपदेश हैं।

2. सबसे छोटी उपनिषद् का नाम लिखकर बताएँ कि इसमें कुल कितने मंत्र हैं।

उत्तर – सबसे छोटी उपनिषद् माण्डूक्योपनिषद् है, जिसमें कुल 12 मंत्र हैं।

3. गीता का संक्षिप्त वर्णन करें।

उत्तर- गीता महाभारत के भीष्मपर्व का अंश है। इसमें कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया है। निराश व्यक्ति को जीवन में कर्म के प्रति प्रवृत्त करना ही इसका उद्देश्य है। इसमें 700 श्लोक हैं जो 18 अध्यायों में विभक्त हैं। बालगंगाधर तिलक महात्मा गाँधी और विनोबा भावे ने इसकी स्वतंत्र रूप से व्याख्या की है। स्वाधीनता संग्राम में इसकी बहुत बड़ी भूमिका रही है।

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