Class 12th geography Chapter 8 part 2 (निर्माण उदोग)

12th geography Chapter 8 part 2
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
1. आधारभूत उद्योग क्या हैं? उदाहरण दें। [2015A)
वे उद्योग जिनके उत्पाद को अन्य वस्तुएँ बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाया जाता है उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं। जैसे-लोहा-इस्पात वस्त्रोद्योग, चीनी उद्योग इत्यादि में प्रयोग में लाया जाता है। इन उद्योगों को चलाने वाली मशीने भी लोहा-इस्पात से बनती है।
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2. गुजरात के चार प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम लिखें। /2025A, 2019A]
गुजरात- भारत का दूसरा सबसे बड़ा वस्त्र उत्पादक राज्य है। अहमदाबाद सूती-वस्त्रों की राजधानी है। इस नगर में 72 मिलें हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण केंद्र बड़ोदरा, सूरत, भावनगर, पोरबंदर, राजकोट तथा भड़ौच हैं।
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3. कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को वर्गीकृत करें। [2013A,2015A, 2018A,2020A)
कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता हैं
(क) कृषि आधारित उद्योग- चीनी उद्योग, वस्त्रोद्योग, भोजन प्रसंस्करण उद्योग।
(ख) खनिज आधारित उद्योग- लोहा इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग।
(ग) रसायन आधारित उद्योग- पेट्रोरसायन उद्योग, प्लास्टिक उद्योग।
(घ) वन आधारित उद्योग- फर्नीचर उद्योग, कागज उद्योग।
(ङ) पशु आधारित उद्योग- चमड़ा उद्योग, ऊनी वस्त्रोद्योग।
4. भारत के चार प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग केंद्रों के नाम लिखें। [2020A]
भारत के चार प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग केंद्रों के नाम निम्नलिखित हैं–(ⅰ) “टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी” (TISCO) (ii) “इंडियन आयरन एण्ड स्टील कंपनी” (11SCO) (iii) विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील लिमिटेड (VISL) (iv) भिलाई (छत्तीसगढ़), राउरकेला (उड़ीसा) और दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) के अतिरिक्त बोकारो (झारखंड), सलेम (तमिलनाडु), विशाखापटनम (आंध्र प्रदेश) और विजयनगर (कर्नाटक) में “स्टील ऑथरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)।
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5. महाराष्ट्र के चार प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम लिखें। 120218/
महाराष्ट्र में सूती वस्त्र उद्योग के 157 कारखाने हैं। इनमें मुम्बई, शोलापुर, अकोला, अमरावती इत्यादि सूती वस्त्र उद्योग के केन्द्र हैं। केवल मुम्बई महानगर में 62 मिलें हैं।
6. भारत के चार वृहत औद्योगिक क्षेत्रों के नाम लिखें। [2013A,2021A]
भारत के चार वृहत औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं- (i) मुंबई-पुणे औद्योगिक प्रदेश, (ii) हुगली औद्योगिक प्रदेश, (iii) बंगलुरु-चेन्नई औद्योगिक प्रदेश, (iv) गुजरात औद्योगिक प्रदेश।
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7. भारत के चार अभ्रक उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए। [2022A]
. भारत विश्व का सबसे बड़ा अभ्रक उत्पादक देश है और यह विश्व का 80% अभ्रक उत्पन्न करता है। भारत के कुल उत्पादन का 60% झारखंड से, 25% राजस्थान से, 12% आंध्रप्रदेश से तथा 3% मध्यप्रदेश, कर्नाटक और उड़ीसा से प्राप्त होता है। भारत में अभ्रक का वितरण इस प्रकार है- (i) झारखंड-झारखंड में उच्च कोटि का अभ्रक कोडरमा, हजारीबाग, गिरिडीह इत्यादि में 150 किमी लंबी और 22 किमी चौड़ी पट्टी में पाया जाता है। (ii) राजस्थान- राजस्थान में अभ्रक की पट्टी लगभग 320 किमी० लंबाई में जयपुर से उदयपुर तक विस्तृत है। (iii) आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में सर्वोत्तम प्रकार के अभ्रक का उत्पादन किया जाता है।’ इनके अतिरिक्त कर्नाटक के मैसूर और हासन जिले, तमिलनाडु के कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरई और कन्याकुमारी जिले, महाराष्ट्र के रत्नागिरी तथा पश्चिम बंगाल के पुरूलिया और बाँकुरा जिले में भी अनक पाया जाता है।
8. पेट्रो-रसायन उद्योग का आधार क्या है? [2022A]
पेट्रो-रसायन उद्योग का कच्चा माल, कच्चा खनिज तेल या अपरिष्कृत पेट्रोल (crude petrol) है। कच्चे पेट्रोलियम से अनेक वस्तुएँ प्राप्त की जाती हैं, जिनका अनेक नये उद्योगों में कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। इन सभी को सम्मिलित रूप से पेट्रो रसायन उद्योग कहा जाता है। परंपरा के अनुसार पेट्रो रसायन में अनेक उत्पाद जैसे प्लास्टिक, कृत्रिम धागे तथा उनसे बनी वस्तुएँ, कृत्रिम रबड़, पटाखा इत्यादि को शामिल किया जाता है। पेट्रो-रसायन उद्योग से बनी अनेक चीजों का इस्तेमाल हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं। इनके कुछ उदाहरण हैं, कृत्रिम रेशम के कपड़े, टूथ-ब्रश, साबुनदानी, पेस्ट का ढक्कन, प्लास्टिक के मग, बाल्टी, रेडियो के केस, सनमाइका, डिटर्जेंट, बाल प्वाइंट पेन, बिजली के स्विच, कीटनाशक, दूध की थैलियाँ इत्यादि।
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9. औद्योगिक बस्ती किसे कहा जाता है? [2022A
यह कारखानों या उद्योगों का ऐसा समूह है जिसका निर्माण उपयुक्त स्थान तथा आर्थिक आधार पर किया जाता है एवं जहाँ जल परिवहन, वैकिंग, पोस्ट ऑफिस, विद्युत, कैण्टीन, सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा, तकनीकि परामर्श तथा सामान्य सेवा तथा सुविधाएँ उपलब्ध रहती है। जैसे- जमशेदपुर, भिलाई, बोकारो इत्यादि।
] 10. भारत के चार ताँबा उत्पादक केंद्रों का उल्लेख कीजिए। [2023A]
भारत में ताँबा धारबाढ़ क्रम की चूटानों में प्रमुख रूप से मिलता है। यहाँ मुख्य रूप से ताँबा मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और आंध्र प्रदेश में पाया जाता है। ताँबा का मुख्य अयस्क क्यूप्राइट है। अयस्क में ताम्न अंश 0.87 से 1.0% के मध्य मिलता है। चार तांबा उत्पादक केंद्र निम्न हैं- (a) मध्यप्रदेश-बालाघाट जिले का मलजखण्ड क्षेत्र (b) राजस्थान-झुंझुनू जिले का खेतड़ी सिंघाना क्षेत्र (c) झारखण्ड-सिंहभूम, घाटशिला (d) आंध्रप्रदेश अग्निगुंडला क्षेत्र।
11. भारत के चार सूतीवस्त्र उद्योग केंद्रों के नाम लिखिए। [2023A]
भारत में सूती वस्त्र परम्परागत उद्योग है। इसे मातृ उद्योग का दर्जा दिया गया है। भारत में चार सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र निम्न हैं- (a) महाराष्ट्र यहाँ 125 मिले हैं, मुम्बई को सूती वस्त्रों की राजधानी कही जाती है। (b) गुजरात-अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है। (c) तमिलनाडु कोयम्बटूर यह दक्षिण भारत का मैनचेस्टर है। (d) कर्नाटक-हुबली
12. उत्तर भारत के दो लौह इस्पात उद्योग केंद्रों के नाम लिखिए। [2023A]
लौह इस्पात उद्योग आधारभूत उद्योग है। उत्तर भारत में झारखंड और उड़ीसा में इसके लिए उपयुक्त परिस्थिति उपलब्ध है। झारखंड में टाटा लौह इस्पात कम्पनी (TISCO) की स्थापना 1907 में जमशेदजी टाटा ने की थी। उड़ीसा में 1959 में राउरकेला इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई है। यह हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड का इस्पात संयंत्र है।
13. उद्योगों की स्थिति को प्रभावित करनेवाले किन्हीं दो कारकों का उल्लेख कीजिए। (2024A]
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कुछ कारक निम्न हैं- (1) कच्चा माल (Raw Materials) सभी उद्योगों में कच्चा माल का प्रयोग होता है, जिसे सस्ते दर पर उपलब्ध होना चाहिए। भारी वजन, सस्ते मूल्य एवं भार हासमूलक कच्चा माल पर आधारित उद्योग कच्चा माल के स्रोत के समीप ही स्थित होते हैं, जैसे-लोहा-इस्पात, सीमेंट और चीनी उद्योग। (ii) बाजार (Markets)- उद्योगों से उत्पादित माल की माँग और वहाँ के निवासियों की क्रयशक्ति को बाजार कहा जाता है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया वैश्विक बाजार हैं। द० पू० एशिया के घने बसे क्षेत्र भी व्यापक बाजार हैं। ये सभी उद्योगों की स्थापना को सहायता पहुँचाते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
1. भारत के लौह एवं इस्पात उद्योग के विकास एवं वितरण का वर्णन करें। [2015A]
भारत में लोहा इस्पात उद्योग की स्थापना के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाएँ मिलती है। यहाँ उच्च कोटि का हेमाटाइट लौह अयस्क, बिटुमिनस कोयला, चूना पत्थर, मैंगनीज इत्यादि पर्याप्त मात्रा में छत्तीसगढ़, उत्तरी उड़ीसा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अर्द्धचंद्राकार क्षेत्र में उपलब्ध है। ऐतिहासिक विकास : भारत में हजारों वर्ष पूर्व उत्तम कोटि का इस्पात बनाया जाता था। दिल्ली का लौह-स्तंभ तथा कोणार्क मंदिर की लोहे की कड़ियाँ इसके प्रमाण है। भारत में लोहा-इस्पात का सबसे पहला कारखाना 1830 में तमिलनाडु में पोर्टोनोवो (Portonovo) नामक स्थान पर स्थापित किया गया, परंतु प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इसे बंद कर दिया गया। आधुनिक युग का पहला कारखाना 1874 ई० में पश्चिम बंगाल में कुल्टी नामक स्थान पर खुला, जिसे बाद में “बराकर आयरन वर्क्स” के नाम से जाना गया। आधुनिक ढंग का बड़ा कारखाना 1907 ई० में झारखंड में स्वर्णरेखा घाटी के साकची नामक स्थान पर खुला। इसका नाम “टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी” (TISCO) रखा गया। इसके संस्थापक उद्योगपति जमशेदजी नौसेरवान जी टाटा थे। इसी के निकट बर्नपुर में 1919 ई० में एक कारखाना खोला गया, जो आज “इंडियन आयरन एण्ड स्टील कंपनी” (IISCO) के नाम से प्रसिद्ध है। इसी में 1936 ई० में कुल्टी के “बराकर आयरन वर्क्स” को मिला दिया गया। इस प्रकार स्वतंत्रता के पूर्व भारत में जमशेदपुर, कुल्टी-बर्नपुर तथा भद्रावती में लोहा इस्पात के कारखाने स्थित थे। ये सभी कारखाने निजी क्षेत्र में थे, किंतु भद्रावती के कारखाना को 1963 ई० में सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोहा-इस्पात उद्योग का विकास तेजी से हुआ। भिलाई (छत्तीसगढ़), राउरकेला (उड़ीसा) और दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) के अतिरिक्त बोकारो (झारखंड), सलेम (तमिलनाडु), विशाखापटनम (आंध्र प्रदेश) और विजयनगर (कर्नाटक) में कारखाने खोले गए। ये सभी कारखाने सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं तथा “स्टील ऑथरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के नियंत्रण में है, जिसे 1974 ई० में कायम किया गया। वितरण : भारत में लोहा-इस्पात उद्योग का वितरण इस प्रकार है- (1) टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी (TISCO)- यह मुम्बई-कोलकाता रेलमार्ग पर स्थित है। यहाँ के इस्पात के निर्यात के लिए सबसे नजदीक (लगभग 240 किमी० दूर) पत्तन कोलकाता है। संयंत्र को पानी स्वर्ण रेखा और खरकई नदियों से, लोहा नोआमुंडी और बादाम पहाड़ से, कोयला झरिया और रानीगंज से तथा जलविद्युत दामोदर घाटी से मिलती है। (ii) इंडियन आयरन एण्ड स्टील कंपनी (IISCO) – इसकी तीन इकाइयाँ कुल्टी, हीरापुर और बर्नपुर में स्थित है। ये तीनों संयंत्र दामोदर घाटी कोयला क्षेत्रों के निकट कोलकाता-आसनसोल रेलमार्ग पर स्थित है। इसे लौह अयस्क सिंहभूम से, जल बराकर नदी से, चूना पत्थर पलामू से तथा मैंगनीज मध्यप्रदेश से प्राप्त होता है। यह संयंत्र सरकार द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया है।1) राउरकेला इस्पात संबंत्र- यह कारखाना 1954 ई० में जर्मनी की सहायता से उड़ीसा के राउरकेला स्थान पर स्थापित किया गया। अन्य सुविधाओं के अतिरिक्त इसे कोइल और शंख नदियों से जल तथा हीराकुंड परियोजना से जलविद्युत मिलती है। (iv) बोकारो इस्पात संयंत्र यह इस्पात संयंत्र रूस के सहयोग से 1964 में दामोदर नदी के किनारे झारखंड के बोकारो नामक स्थान पर स्थापित किया गया। यह भारत का सबसे बड़ा संयंत्र है।
2. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करनेवाले कारकों की विवेचना करें। [2016A
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कुछ कारक निम्न हैं- (1) कच्वा-माल (Raw Materials)- सभी उद्योगों में कच्चा माल का प्रयोग होता है, जिसे सस्ते दर पर उपलब्ध होना चाहिए। भारी वजन, सस्ते मूल्य एवं भार हासमूलक कच्चा माल पर आधारित उद्योग कच्चा माल के स्रोत के समीप ही स्थित होते हैं, जैसे-लोहा-इस्पात, सीमेंट और चीनी उद्योग। (ii) बाजार (Markets)- उद्योगों से उत्पादित माल की माँग और वहाँ के निवासियों की क्रयशक्ति को बाजार कहा जाता है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया वैश्विक बाजार हैं। द० पू० एशिया के घने बसे क्षेत्र भी व्यापक बाजार हैं। ये सभी उद्योगों की स्थापना को सहायता पहुँचाते हैं। (iii) श्रम (Labour) – उद्योगों की अवस्थिति के लिए कुशल एवं अकुशल श्रमिक भी आवश्यक हैं। मुम्बई और अहमदाबाद के सूती वस्त्रोद्योग मुख्यतः बिहार और उत्तर प्रदेश से आये श्रमिकों पर आधारित हैं। स्विट्जरलैंड का घड़ी उद्योग और सूरत का हीरा तराशने का उद्योग कुशल श्रमिकों पर आश्रित हैं। (iv) ऊर्जा के स्त्रोत (Sources of power)- जिन उद्योगों में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, वे ऊर्जा के स्त्रोतों के समीप ही लगाये जाते हैं, जैसे पिट्सवर्ग और जमशेदपुर में लोहा-इस्पात उद्योग। आजकल विद्युत-ग्रिड द्वारा जल विद्युत और पाइपलाइन द्वारा खनिज तेल दूर तक पहुँच जाते हैं और इनके उत्पादन के समीप उद्योगों को लगाना आवश्यक नहीं है। (v) जल (Water) सूती वस्त्रोद्योग में कपड़ा की धुलाई, रंगाई इत्यादि के लिए तथा लोहा-इस्पात उद्योग में प्रक्रमण, भाप निर्माण और लोहे को ठंढा करने के लिए जल आवश्यक है। अतः इनकी स्थापना जल स्रोत के समीप ही होती है। (vi) परिवहन एवं संचार (Transport and Communication)-कच्चे माल को कारखाने तक लाने और तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन सुविधाएँ आवश्यक हैं। (vii) प्रबंधन (Management)- यह जानना आवश्यक है कि उद्योग के लिए चुने गए स्थल अच्छे प्रबंधकों को आकर्षित करने योग्य हैं या नहीं। (viii) पूँजी (Capital)- यद्यपि बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से देश के भीतर अब पूँजी अधिक गतिशील हो गई, फिर भी अशांत और खतरनाक क्षेत्र में उत्पादन अनिश्चित होता है और ये पूँजी के लिए कम आकर्षक होते हैं। (ix) सरकारी नीति (Government Policy) – संतुलित आर्थिक विकास हेतु सरकार कुछ निश्चित क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करती है। देश के संसाधनों के प्रयोग से सर्वोत्तम लाभ के लिए भी विशिष्ट क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना की जाती है। (x) पर्यावरण (Environment) उद्योगों की स्थापना, उद्योगकर्मी के रहन-सहन इत्यादि की सुविधा के लिए उपयुक्त भूमि, जलवायु और पर्यावरण के अन्य तत्त्व आवश्यक हैं। . –
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3. उद्योगों के स्थानीयकरण के कारकों की विवेचना कीजिए। [2018A]
उद्योगों के स्थानीयकरण के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-
(1) कच्या-माल (Raw Materials)- सभी उद्योगों में कच्चा माल का प्रयोग होता है, जिसे सस्ते दर पर उपलब्ध होना चाहिए। भारी वजन, सस्ते मूल्य एवं भार हासमूलक कच्चा माल पर आधारित उद्योग कच्चा माल के स्रोत के समीप ही स्थित होते हैं, जैसे-लोहा-इस्पात, सीमेंट और चीनी उद्योग। (II) बाजार (Markets)- उद्योगों से उत्पादित माल की माँग और वहाँ के निवासियों की क्रयशक्ति को बाजार कहा जाता है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया वैश्विक बाजार हैं। द० पू० एशिया के घने बसे क्षेत्र भी व्यापक बाजार हैं। ये सभी उद्योगों की स्थापना को सहायता पहुँचाते हैं। (III) श्रम (Labour) उद्योगों की अवस्थिति के लिए कुशल एवं अकुशत श्रमिक भी आयश्यक हैं। मुम्बई और अहमदाबाद के सूती वस्त्रोद्योग मुख्यतः बिहार और उत्तर प्रदेश से आये श्रमिकों पर आधारित है। स्विट्जरलैंड का घड़ी उद्योग और सूरत का हीरा तराशने का उद्योग कुशल श्रमिकों पर आश्रित हैं। (Iv) ऊर्जा के स्रोत (Sources of power) – जिन उद्योगों में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, वे ऊर्जा के स्रोतों के समीप ही लगाये जाते हैं, जैसे पिट्सवर्ग और जमशेदपुर में लोहा-इस्पात उद्योग। आजकल विद्युत-ग्रिड द्वारा जल विद्युत और पाइपलाइन द्वारा खनिज तेल दूर तक पहुँच जाते हैं और इनके उत्पादन के समीप उद्योत को लगाना आवश्यक नहीं है। (v) जल (Water) सूती वस्त्रोद्योग में कपड़ा की घुलाई, रंगाई इत्यादि के लिए तथा लोहा-इस्पात उद्योग में प्रक्रमण, भाप निर्माण और लोहे को ठंडा करने के लिए जल आवश्यक है। अतः इनकी स्थापन जल स्रोत के समीप ही होती है। (vi) परिवहन एवं संचार (Transport and Communication) कच्चे माल को कारखाने तक लाने और तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन सुविधाएँ आवश्यक है। (vil) प्रबंधन (Management)- यह जानना आवश्यक है कि उद्योग के लिए चुने गए स्थल अच्छे प्रबंधकों को आकर्षित करने योग्य हैं या नहीं। (viii) पूँजी (Capital)- यद्यपि बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से देश के भीतर अब पूँजी अधिक गतिशील हो गई, फिर भी अशांत और खतरनाक क्षेत्र में उत्पादन अनिश्चित होता है और ये पूँजी के लिए कम आकर्षक होते हैं। (ix) सरकारी नीति (Government Policy) – संतुलित आर्थिक विकास हेतु सरकार कुछ निश्चित क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करती है। देश के संसाधनों के प्रयोग से सर्वोत्तम लाभ के लिए भी विशिष्ट क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना की जाती है। (x) पर्यावरण (Environment) उद्योगों की स्थापना, उद्योगकर्मी के रहन-सहन इत्यादि की सुविधा के लिए उपयुक्त भूमि, जलवायु और पर्यावरण के अन्य तत्त्व आवश्यक हैं।
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4. भारत में लौह अयस्क के वितरण का विवरण दीजिए। [2018A]
लौह अयस्क जिन धात्विक खनिजों में लौह अयस्क पाया जाता हैं। लौह युक्त धात्विक खनिज कहलाती है। लोहा आज भी सभ्यता की रीढ़ हैं। यह औद्योगिक विकास की आधारशिला है। यह लौह अयस्क के रूप में पाया जा है। भारत में हेमेटाइट और मैग्नेटाइट अयस्क मुख्य रूप से उड़ीसा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, केरल, तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश में पाया जाता है। भारत का विश्व में उत्पादन में चौथा स्थान है। भारत का 95% लौह अयस्क का संचित भंडार उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोवा और तमिलनाडु में हैं। लौह अयस्क का वितरण -उड़ीसा सुंदरगढ़, मयूरभंज, कोइरा घाटी इत्यादि। छत्तीसगढ़ राव घाट, दुर्ग, दंतेवाड़ा इत्यादि। झारखण्ड सिंहभूम, राजोरी, इत्यादि। गोवा-उत्तरी गोवा, दक्षिण गोवा इत्यादि। कर्नाटक-बेलगारी, चिकम्बलूर इत्यादि।
5. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास और वितरण का वर्णन कीजिए । [2019A] ANSWERS
वितरण यह देश का सबसे अधिक विकेंद्रीकृत उद्योग है। विशेष रूप से इसका जमाव गंगा के मैदान और प्रायद्वीपीय भू-भाग के शुष्क पश्चिमी भागों में अधिक मिलता है। सूत्ती-वस्त्र उद्योग हमारे देश में निम्न प्रकार से विकेंद्रित है-
(1) महाराष्ट्र-यह राज्य प्रथम स्थान रखता है। यहाँ पर 122 मिलें हैं जिनमें से अकेले मुंबई महानगर में 63 मिलें हैं। इसलिए इसे सूतीवस्त्रों की राजधानी कहते हैं। शोलापुर, अकोला, अमरावती, वर्धा, पूना, सतारा, कोल्हापुर, नागपुर आदि सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र हैं।
(ii) गुजरात यह दूसरा सबसे बड़ा वस्त्र उत्पादक राज्य है। यहां पर 150 मिलें हैं। इस राज्य में वही सब सुविधाएँ प्राप्त हैं, जो महाराष्ट्र राज्य को प्राप्त है। अहमदाबाद सूती वस्त्रों की राजधानी है। इस नगर में 70 मिलें हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण केंद्र बड़ोदरा, सूरत, भावनगर, पोरबंदर, राजकोट तथा भड़ौच हैं।
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