निश्चयवाद, पर्यावरणीय निश्चयवाद या नियतिवाद एक पुरानी विचारधारा है। इसके अनुसार विकास की प्रारंभिक अवस्था में मानव प्राकृतिक वातावरण से अधिक प्रभावित हुआ और उन्होंने प्रकृति के आदेशों के अनुसार अपने आपको ढाल लिया। इसका कारण यह है कि मानव के सामाजिक विकास की अवस्था आदिम थी और प्रौद्योगिकी का स्तर अत्यन्त निम्न था। उस अवस्था में मानव प्रकृति को सुनता था, उसकी प्रचंडता से भयभीत होता था और उसकी पूजा करता था। इसमें मनुष्य का स्थान गौण था।
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2. मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम लिखें। [2020A.2024A)
. मानव भूगोल की प्रकृति अत्यन्त अन्तर विषयक है और यह सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है। ज्ञान के विस्तार के साथ नये उपक्षेत्रों का विकास हुआ है। मानव भूगोल के उप-क्षेत्र हैं-व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, अवकाश का भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगोल, संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल, उद्योग भूगोल, विपणन भूगोल, व्यापारिक भूगोल और पर्यटन भूगोल ।
3. मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए। (2015A,2017A,2019,2021A,2023A]
मानव भूगोल भौतिक/प्राकृतिक एवं मानवीय जगत के बीच संबंध, मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विभिन्नताओं का अध्ययन करता है। इसमें मानव और प्रकृति के बीच सतत परिवर्तनशील पारस्परिक क्रिया से उत्पन्न सांस्कृतिक लक्षणों की स्थिति एवं वितरण का अध्ययन किया जाता है।
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4. निश्चयवाद और संभववाद के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। 12025A, 2023A)
. भूगोल में मानव और प्रकृति के संबंधों को भूगोलवेत्ताओं ने अपने-अपने विचारों को व्यक्त किया है। निश्चयवादी विचारधारा के प्रतिपादक हम्बोल्टर, रिटर रैटजैल और कुमारी सैम्पूल है। ये प्रकृति को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। मनुष्य को प्रकृति के आदेशों के अनुसार अपने को ढालना चाहिए। संभववाद विचारधारा के प्रतिपादक लूसियन फैनै, स्लाश इत्यादि हैं। इनका मानना है कि प्रकृति अवसर प्रदान करती है और मानय उसका उपयोग करता है। प्रकृति का मानवीकरण किया जा सकता है। मानव अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्रकृति का उपयोग करता है।
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5. आर्थिक भूगोल के दो उपक्षेत्रों के नाम लिखिए। [2023A]
आर्थिक भूगोल के दो उपक्षेत्र- (a) संसाधन भूगोल (b) कृषि भूगोल। संसाधन भूगोल में विभिन्न प्रकार के खनिज और मानवीय संसाधनों का अध्ययन क्षेत्रीय स्तर पर किया जाता है। जैसे कोयला, लौह अयस्क, जल संसाधन इत्यादि। कृषि भूगोल के अन्तर्गत कृषि के विभिन्न प्रकार और फसलों सस्यगहनता का अध्ययन किया जाता है। विभिन्न फसलों के प्रमुख उत्पादन क्षेत्र इत्यादि।
6. मानव का प्राकृतीकरण क्या है?
भौगोलिक संरचना, जलवायु, वनस्पति और जीव-जन्तु पर्यावरण का निर्माण करते हैं। यह मानव के आचरण, विवेक, जीवन-शैली आदि को नियंत्रित करता है। मान भी अपनी क्रियाकलापों से प्रकृति को नियंत्रित करने का प्रयास करती है। प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर की जाने वाली विकासात्मक प्रक्रिया को ही मानव का प्रकृतिकरण कहते हैं।
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. ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियों में क्या अंतर है?
ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती में निम्नलिखित अंतर हैं- (i) ग्रामीण बस्तियों के आकार छोटे होते हैं और नगरी बस्तियों के बड़े। (ii) ग्रामीण बस्तियों में प्राथमिक कार्यों की प्रधानता रहती है, जबकि नगरीय बस्तियों में द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक इत्यादि कार्यों की ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
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1. संभववाद की संकल्पना का परीक्षण करें।
संभववाद की संकल्पना के जनक फ्रांसीसी विद्वान प्रो० विडाल डी०ला ब्लॉश थे, यद्यपि इस शब्द (संभववाद) का नाम सबसे पहले उनके शिष्य फैने ने दिया था। यह संकल्पना निश्चयवाद या नियतिवाद की इस संकल्पना को पूरी तरह अस्वीकार करती है कि मनुष्य प्रकृति का दास है। इस विचारधारा के अनुसार भौतिक पर्यावरण मनुष्यों को अनेक अवसर प्रदान करता है, जिनमें से वे अपनी सांस्कृतिक आवश्यकताओं और मानदंडों के अनुसार चुन लेते हैं। इस विचारधारा में प्राकृतिक सीमाएं तो मानी गयी हैं, लेकिन व्यक्ति को चुनने की स्वतंत्रता को महत्त्व दिया गया है। संभववाद की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं-
(i) प्राकृतिक पर्यावरण मानव जीवन को नियंत्रित नहीं करता है
।(ii) पर्यावरण मनुष्य के सामने कुछ संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
(iii) प्राकृतिक पर्यावरण इसमें निष्क्रिय है और मनुष्य उसमें सक्रिय है।
(iv) मनुष्य अपनी सांस्कृतिक आवश्यकताओं और तकनीकी ज्ञान के विकास के आधार पर पर्यावरण द्वारा प्रस्तुत संभावनाओं का अपनी सुविधाओं के लिए उपयोग करता है।
(v) मनुष्य अपने क्रियाकलापों से पर्यावरण को प्रभावित करता है।वातानुकूलित घरों का निर्माण करके अत्यधिक गर्म और ठंढे स्थानों पर चैन से रहना, कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो प्राकृतिक पर्यावरण पर मनुष्य के श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं। आज कृत्रिम प्रजनन की तकनीकों से पशुओं के नस्लों को विकसित किया जा रहा है।